गया शहर से महज़ 12 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहीं महाबोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
नेचर लवर्स और एडवेंचर के शौकीनों के लिए प्रागबोधि या डुंगेश्वरी गुफाएं एक शानदार जगह हैं। पहाड़ियों से घिरी ये गुफाएं वही स्थान हैं जहां तपस्या के दौरान बुद्ध ने कई वर्ष बिताए थे।
शहर के बीचों-बीच बहती फल्गु नदी का अपना एक अलग आकर्षण है। फल्गु नदी के शांत घाटों पर शाम के समय टहलना, रिवरफ्रंट का आनंद लेना और स्थानीय गतिविधियों को देखना एक सुकून देने वाला अनुभव है।
गया का पुराना शहर अपनी तंग गलियों, औपनिवेशिक काल की इमारतों और पारंपरिक पत्थरों की कारीगरी के लिए मशहूर है। यहां हेरिटेज वॉक करते हुए आप स्थानीय कारीगरों को पत्थरों को तराशते हुए देख सकते हैं। इसके अलावा यहां की बाजारों में टहलते हुए स्थानीय संस्कृति को बेहद करीब से महसूस किया जा सकता है।
गया और बोधगया में हर बजट के हिसाब से रुकने की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं। सोलो ट्रैवलर्स के लिए बोधगया में 500 से 1000 रुपये में स्वच्छ गेस्ट हाउस और होमस्टे मिल जाते हैं। वहीं परिवारों के लिए 2000 से 4000 रुपये के बजट में आधुनिक सुविधाओं वाले 3-स्टार और 4-स्टार होटल आसानी से मिल जाते हैं।
यहां के सफर में स्थानीय जायके का लुत्फ उठाना बिल्कुल न भूलें। रमना रोड पर मिलने वाला खस्ता तिलकुट, देसी घी का अनरसा और मखाने की लाई हर ट्रैवलर की पहली पसंद होती है। बाज़ार से आप हस्तशिल्प, बुद्ध की नक्काशीदार मूर्तियां और पीतल के सामान स्मृति चिन्ह (Souvenir) के रूप में खरीद सकते हैं।
गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, गया जंक्शन रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्गों से देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। यहां घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे मुफीद माना जाता है, जब मौसम सुहावना होता है। मात्र 2 से 3 दिनों के बजट में आप इस ऐतिहासिक शहर को पूरी तरह एक्सप्लोर कर सकते हैं।लोकल मार्केट