भारत के इन जगहों पर एक-दूसरे को रंग नहीं लगाते लोग, भूलकर भी नहीं खेली जाती है होली

देशभर मे ंलोग आज यानी 4 मार्च को होली खेल रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां कभी होली नहीं खेली जाती है। इन जगहों पर भूलकर भी लोग एक दूसरे पर रंग नहीं डालते हैं और ना ही पानी के गुब्बारे मारे जाते हैं।

Authored by: सृष्टिUpdated Mar 4 2026, 10:37 IST
भारत में यहां नहीं खेली जाती है होलीImage Credit : Canva01 / 08

भारत में यहां नहीं खेली जाती है होली

​रामसन गांव, गुजरात​Image Credit : Canva02 / 08

​रामसन गांव, गुजरात​

गुजरात के रामसन गांव में करीब 200 सालों से होली नहीं मनाई जाती है। मान्यता है कि होलिका दहन के दिन गांव में भीषण आग लग गई थी और कई घर जलकर राख हो गए थे। इस हादसे के बाद गांववालों ने होली मनाना बंद कर दिया और आज तक ये परंपरा जारी है।

​दुर्गापुर गांव, झारखंड​Image Credit : Canva03 / 08

​दुर्गापुर गांव, झारखंड​

झारखंड के दुर्गापुर में भी होली न मनाने की परंपरा है। कहा जाता है कि होली के दिन यहां के राजा दुर्गा प्रसाद की हत्या हो गई थी। इस घटना के बाद गांव में होली बंद कर दी गई। सालों बाद कुछ लोगों ने होली मनाने की कोशिश की, लेकिन उसी दिन दो लोगों की मौत हो गई। तब से लोग इसे अशुभ मानते हैं और होली नहीं खेलते हैं।

​पुडुचेरी​Image Credit : Canva04 / 08

​पुडुचेरी​

पुडुचेरी जिसे आम बोलचाल में पोंडिचेरी भी कहा जाता है में होली उत्तर भारत जितनी धूमधाम से पारंपरिक रूप से नहीं मनाई जाती। इसका मुख्य कारण यहाँ की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है। पुडुचेरी पर लंबे समय तक फ्रांसीसी शासन रहा, और आज भी यहाँ दक्षिण भारतीय संस्कृति और ईसाई समुदाय का प्रभाव अधिक है।

​लेक पुलीकट कम्यूनिटीज​Image Credit : Canva05 / 08

​लेक पुलीकट कम्यूनिटीज​

लेक पुलीकट भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है। इस क्षेत्र में रहने वाली पुलीकट कम्यूनिटीज मुख्य रूप से मछुआरा समुदायों और पारंपरिक ग्रामीण समाज से जुड़ी हैं। इन क्षेत्रों का जीवन मुख्य रूप से मछली पकड़ने और प्रकृति पर निर्भर होता है, इसलिए उनके त्योहार भी समुद्र, झील और स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़े होते हैं। यहां होली नहीं मनाई जाती है।

लक्ष्यद्वीपImage Credit : Canva06 / 08

लक्ष्यद्वीप

लक्षद्वीप में होली पारंपरिक रूप से नहीं मनाई जाती, क्योंकि यहाँ की अधिकांश आबादी मुस्लिम समुदाय से संबंधित है और उनकी धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराएँ अलग हैं। लक्षद्वीप में ईद, बकरीद और अन्य इस्लामी त्योहार प्रमुख रूप से मनाए जाते हैं।

​क्वीली और खुरजन, उत्तराखंड​Image Credit : Canva07 / 08

​क्वीली और खुरजन, उत्तराखंड​

उत्तराखंड के खुरजान और किवली गांव में भी करीब 150 सालों से होली नहीं मनाई जाती है। यहां के लोगों का विश्वास है कि उनकी कुलदेवी त्रिपुर सुंदरी को शोर और हंगामा पसंद नहीं है। अगर गांव में होली खेली गई तो देवी नाराज हो सकती हैं। इसी आस्था के कारण आज भी इन गांवों में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है।

​कूचीपुरा गांव, मध्य प्रदेश​Image Credit : Canva08 / 08

​कूचीपुरा गांव, मध्य प्रदेश​

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कूचीपुरा गांव में भी होली नहीं खेली जाती है। लोगों का कहना है कि सदियों पहले एक संत ने नाराज होकर गांव को श्राप दिया था कि अगर यहां होली मनाई गई तो परिवारों पर संकट आएगा। इसी डर और आस्था के कारण आज भी यहां रंगों का त्योहार नहीं मनाया जाता है।

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