पेगासस दुनिया का सबसे शक्तिशाली और विवादित स्पाइवेयर (जासूसी सॉफ्टवेयर) है, जिसे इजरायली साइबर-इंटेलिजेंस कंपनी NSO Group Technologies ने विकसित किया है। यह सॉफ्टवेयर मोबाइल फोन को बिना यूजर को पता चले हैक कर सकता है और उसके डेटा, कॉल, संदेश, लोकेशन, कैमरा/माइक्रोफोन समेत कई जानकारी को हैकर तक भेज सकता है।
NSO का दावा है कि Pegasus को केवल सरकारी सुरक्षा एजेंसियों को कहा गया उद्देश्य जैसे आतंकवाद और गंभीर अपराधों का मुकाबला के लिए बेचता है, लेकिन 2019 के विवाद ने एनएसओ के इस दावे को पूरी तरह से नाकार दिया।
पेगासस स्पाइवेयर zero-click तकनीक के जरिए काम करता है, जिसका अर्थ है कि फोन मालिक को कोई लिंक क्लिक करने या App खोलने की आवश्यकता नहीं होती। यह मैसेज, कॉल या ऐप की खामियों (vulnerabilities) का फायदा उठाकर फोन में चुपचाप इंस्टॉल हो सकता है। photo-kaspersky
सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए दुनिया के किसी भी फोन में यह इंस्टॉल हो सकता है। इंस्टॉल होने के बाद यह फोन के SMS, ईमेल, फोटो, संपर्क, जीपीएस लोकेशन और अन्य निजी डेटा को हैकर तक भेजने लगता है और अक्सर माइक्रोफोन/कैमरा भी एक्टिवेट कर सकता है।
पेगासस स्पाइवेयर को इजरायल स्थित NSO Group नामक कंपनी ने विकसित किया है। यह कंपनी इसे आम लोगों को नहीं बल्कि केवल सरकारी एजेंसियों को बेचती है। 2016 की रिपोर्ट के अनुसार Pegasus इंस्टॉल करने के लिए लगभग $650,000 (लगभग 5 करोड़ रुपये + सैट-अप फीस) तक की लागत लग सकती है, जबकि कुछ रिपोर्टों में 10 डिवाइस हैकिंग के लिए लगभग 8 करोड़ रुपये तक खर्च बताया गया है।
2019 में पेगासस सबसे बड़े विवाद में तब आया जब मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने NSO Group पर मुकदमा दायर किया। आरोप था कि Pegasus ने WhatsApp के वीडियो कॉलिंग फीचर में एक बग का इस्तेमाल कर लगभग 1,400 उपयोगकर्ताओं के फोन को हैक किया, जिनमें पत्रकार, कार्यकर्ता और अन्य नागरिक शामिल थे। 2025 में एक अमेरिकी संघीय अदालत ने NSO Group को WhatsApp/Meta को लगभग $167 मिलियन (लगभग 1,400 करोड़ रुपये) देने का आदेश दिया, यह Pegasus के अवैध उपयोग के खिलाफ बड़ी जीत मानी गई।
विशेषकर 2019 तक Pegasus व्हाट्सऐप मिस्ड कॉल या अन्य बग का उपयोग करके फोन में इंस्टॉल हो जाता था, जिससे यूजर को पता भी नहीं चलता था कि उसका डेटा चोरी हो रहा है। यह फोन सिस्टम की सुरक्षा को जेलब्रेक (iOS) या रूट (Android) करके अपने आप को इंस्टॉल कर लेता था।
पेगासस के इस्तेमाल को लेकर कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि राजनीतिक नेता, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इसके लक्षित रहे हैं। भारत में यह विवाद तब उभरा जब कई नाम बताए गए, जिनमें राजनीतिक नेताओं और जजों के फोन का हैक होने के दावे भी शामिल रहे।
वैश्विक स्तर पर Pegasus प्रोजेक्ट और अन्य जांचों में यह भी दावा हुआ कि फ्रांस के राष्ट्रपति के परिवार के सदस्यों के फोन भी संभावित तौर पर निशाना बने। इसके अलावा अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का फोन भी पेगासस के जरिए ही हैक हुआ था। दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम पर भी इसी स्पाईवेयर के जरिए पत्नी की जासूसी का आरोप है।