कहां से आया QR Code, कब हुआ था पहली बार इस्तेमाल, कैसे करता है ये काम? जानें इसकी पूरी ABCD

आज हम जब भी कोई चीज खरीदते हैं तो उसके पेमेंट के लिए स्मार्टफोन निकालते हैं और दुकान में रखे QR Code को स्कैन करते हैं और फटाफट ऑनलाइन पेमेंट कर देत हैं। यह काम हम दिन में कई बार करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है जिस QR कोड ने हमें उसकी सहूलियत दी है आखिर उसे बनाया किसने और कब इसका पहली बार इस्तेमाल हुआ था?

Authored by: Updated Oct 13 2025, 14:57 IST
​आज के समय में अधिकांश लोग ऑनलाइन माध्यम से ही पेमेंट करते हैं। चाहे किराना स्टोर हो या फिर पेट्रोल पंप, जहां कहीं भी हमें ऑनलाइन पेमेंट करना होता है हम स्मार्टफोन निकालते हैं QR Code स्कैन करते हैं और तुरंत पेमेंट कर देते हैं। पेमेंट करने की इस सुविधा ने करोड़ों लोगों को बड़ी सहूलियत दी है। Image Credit : IStock01 / 08

​आज के समय में अधिकांश लोग ऑनलाइन माध्यम से ही पेमेंट करते हैं। चाहे किराना स्टोर हो या फिर पेट्रोल पंप, जहां कहीं भी हमें ऑनलाइन पेमेंट करना होता है हम स्मार्टफोन निकालते हैं QR Code स्कैन करते हैं और तुरंत पेमेंट कर देते हैं। पेमेंट करने की इस सुविधा ने करोड़ों लोगों को बड़ी सहूलियत दी है।

​हम लोग दिन में न जाने कितनी बार अपने स्मार्टफोन से QR Code को स्कैन करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस QR Code को किसने बनाया और सबसे पहले इसका इस्तेमाल कब शुरू हुआ?  क्या आप जानते हैं कि आखिर इस QR Code की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है जिससे किसी को फटाफट पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं।Image Credit : IStock02 / 08

​हम लोग दिन में न जाने कितनी बार अपने स्मार्टफोन से QR Code को स्कैन करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस QR Code को किसने बनाया और सबसे पहले इसका इस्तेमाल कब शुरू हुआ? क्या आप जानते हैं कि आखिर इस QR Code की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है जिससे किसी को फटाफट पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं।

​क्यूआर कोड तो हम सब लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन, अधिकांश लोगों को इसका फुल फॉर्म भी नहीं मालूम होता। अगर आप भी इन सब सवालों से अंजान हैं तो आज की खबर आपके काफी काम आने वाली है।  हम आपको QR Code की हर एक छोटी बड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।Image Credit : IStock03 / 08

​क्यूआर कोड तो हम सब लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन, अधिकांश लोगों को इसका फुल फॉर्म भी नहीं मालूम होता। अगर आप भी इन सब सवालों से अंजान हैं तो आज की खबर आपके काफी काम आने वाली है। हम आपको QR Code की हर एक छोटी बड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

​डिजिटल वर्ल्ड में QR कोड ने ऑनलाइन पेमेंट समेत कई सारे काम को आसान बना दिया है। QR कोड का फुल फॉर्म Quick Response code होता है। इसने डिजिटल वर्ल्ड में हमारे कई सारे काम को बेहद आसान बना दिया है। फिर चाहे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करना हो या फिर किसी वाई-फाई नेटवर्क से मोबाइल को कनेक्ट करना हो या फिर डॉक्यूमेंट शेयरिंग का काम हो।Image Credit : IStock04 / 08

​डिजिटल वर्ल्ड में QR कोड ने ऑनलाइन पेमेंट समेत कई सारे काम को आसान बना दिया है। QR कोड का फुल फॉर्म Quick Response code होता है। इसने डिजिटल वर्ल्ड में हमारे कई सारे काम को बेहद आसान बना दिया है। फिर चाहे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करना हो या फिर किसी वाई-फाई नेटवर्क से मोबाइल को कनेक्ट करना हो या फिर डॉक्यूमेंट शेयरिंग का काम हो।

​QR Code की सबसे खास बात यह है कि दुनिया भर में मौजूद सभी क्यूआर कोड एक दूसरे से पूरी तरह से अलग होते हैं। मतलब हर क्यूआर कोड अपने आप में यूनिक है। क्या आपको मालूम है कि जिस क्यूआर कोड का हम दिनभर इस्तेमाल करते हैं वह टेक्नोलॉजी कोई आज की टेक्नोलॉजी नहीं है। Image Credit : IStock05 / 08

​QR Code की सबसे खास बात यह है कि दुनिया भर में मौजूद सभी क्यूआर कोड एक दूसरे से पूरी तरह से अलग होते हैं। मतलब हर क्यूआर कोड अपने आप में यूनिक है। क्या आपको मालूम है कि जिस क्यूआर कोड का हम दिनभर इस्तेमाल करते हैं वह टेक्नोलॉजी कोई आज की टेक्नोलॉजी नहीं है।

​QR Code की टेक्नोलॉजी 31 साल पहले ही आ चुकी थी। जिस टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी के कई सारे काम आसान बना दिए उसका आविष्कार एक जापानी इंजीनियर मासाहिरो हारो ने 1994 में किया था। मासाहिरो हारो को QR कोड का आइडिया Go गेम खेलते हुए आया था।Image Credit : IStock06 / 08

​QR Code की टेक्नोलॉजी 31 साल पहले ही आ चुकी थी। जिस टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी के कई सारे काम आसान बना दिए उसका आविष्कार एक जापानी इंजीनियर मासाहिरो हारो ने 1994 में किया था। मासाहिरो हारो को QR कोड का आइडिया Go गेम खेलते हुए आया था।

​अगर आपने कभी Go गेम नहीं खेला है तो बता दें कि इसमें एक गो बोर्ड होता है जिसमें 19 x 19 के ग्रेड बने होते हैं। बता दें कि इस ग्रिड में काले और स्पेद रंग के पत्थर बने होते हैं। मासाहिरो हारो को लगा कि ग्रिड में कई सारी जानकारियों को रखा जा सकता है और इसे कई सारे एंगल और कोणों से पढ़ा भी जा सकता है।Image Credit : IStock07 / 08

​अगर आपने कभी Go गेम नहीं खेला है तो बता दें कि इसमें एक गो बोर्ड होता है जिसमें 19 x 19 के ग्रेड बने होते हैं। बता दें कि इस ग्रिड में काले और स्पेद रंग के पत्थर बने होते हैं। मासाहिरो हारो को लगा कि ग्रिड में कई सारी जानकारियों को रखा जा सकता है और इसे कई सारे एंगल और कोणों से पढ़ा भी जा सकता है।

​इसके बाद मासाहिरो हारो ने ट्योटा कंपनी की सहायक कंपनी डेंसो वेब टीम के साथ मिलकर इस ग्रिड डिजाइन से एक QR कोड तैयार किया। इस क्यूआर कोड में लोकेटर, पहचानकर्ता और वेब ट्रैकिंग के लिए डेटा होता है। शुरुआती चरण में क्यूआर कोड को आटोमोबाइल इंडस्ट्री में पार्ट्स को लेबल करने के लिए किया गया, इसके बाद इसे इलेक्ट्रॉनिक टिकट, कॉन्टैक्ट शेयरिंग और पेमेंट में किया जाने लगा। Image Credit : IStock08 / 08

​इसके बाद मासाहिरो हारो ने ट्योटा कंपनी की सहायक कंपनी डेंसो वेब टीम के साथ मिलकर इस ग्रिड डिजाइन से एक QR कोड तैयार किया। इस क्यूआर कोड में लोकेटर, पहचानकर्ता और वेब ट्रैकिंग के लिए डेटा होता है। शुरुआती चरण में क्यूआर कोड को आटोमोबाइल इंडस्ट्री में पार्ट्स को लेबल करने के लिए किया गया, इसके बाद इसे इलेक्ट्रॉनिक टिकट, कॉन्टैक्ट शेयरिंग और पेमेंट में किया जाने लगा।

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