जब कोई किसी के बहुत करीब आता है, तो उसे अपनी भावनाएं उजागर होने का डर सताने लगता है। अपनी कमजोरियों को सामने रखने का यह भय उन्हें खुद को सुरक्षित रखने के लिए दूर हटने पर मजबूर कर देता है।
अतीत के टूटे रिश्तों या धोखे के दर्द की यादें इंसान को दोबारा भरोसा करने से रोकती हैं। नया रिश्ता गहरा होने पर पुराना डर हावी हो जाता है और वे खुद को दोबारा चोट पहुंचने से बचाने के लिए दूरी बना लेते हैं।
गहरे जुड़ाव के साथ जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता भी आती है। कई बार लोगों को लगता है कि नए रिश्ते में आने से उनकी व्यक्तिगत आजादी, स्पेस या जीवन पर उनका नियंत्रण खत्म हो जाएगा, जिससे वे पीछे हटने लगते हैं।
आत्मविश्वास में कमी या हीनभावना के कारण कुछ लोगों को लगता है कि वे सामने वाले के योग्य नहीं हैं। उन्हें डर रहता है कि बाद में उनका पार्टनर उन्हें छोड़ देगा, इसलिए वे खुद ही पहले दूरियां बना लेते हैं।
जब रिश्ता बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगता है, तो कुछ लोग मानसिक रूप से इसके लिए तैयार नहीं हो पाते। भावनाओं का यह अत्यधिक प्रवाह उन्हें मानसिक तनाव देता है, जिससे संभलने के लिए वे थोड़ा समय और स्पेस चाहते हैं।
करियर, परिवार या निजी जिंदगी के अन्य तनाव भी व्यक्ति को भावनात्मक रूप से थका देते हैं। ऐसे समय में वे रिश्ते में पूरा योगदान नहीं दे पाते और खुद को संभालने के लिए शांत होकर थोड़ा पीछे हट जाते हैं।
कई बार इंसान इस लिए भी अपनी भावनाएं नहीं बता पाता कि उसे लगता है सामने वाला पहल कर। इस उलझन में कई रिश्ते बनने से पहले ही टूट जाते हैं।