AC यानी Alternating Current वह बिजली है जो हमारे घरों के सॉकेट में आती है और इसकी दिशा लगातार बदलती रहती है। वहीं DC यानी Direct Current एक ही दिशा में बहता है, जैसा कि बैटरी में होता है। मोबाइल की बैटरी केवल DC करंट से ही चार्ज होती है, इसलिए सीधे AC से इसे चार्ज नहीं किया जा सकता।
मोबाइल चार्जर सिर्फ बिजली देने का काम नहीं करता, बल्कि वह एक कन्वर्टर (परिवर्तक) की तरह काम करता है। इसका मुख्य काम AC को DC में बदलना होता है। यानी जब आप चार्जर को सॉकेट में लगाते हैं, तो वह AC को लेकर उसे DC में कन्वर्ट करता है और फिर मोबाइल को देता है।
घर की AC सप्लाई आमतौर पर 220V होती है, जो मोबाइल के लिए बहुत ज्यादा है। चार्जर इस वोल्टेज को कम करके लगभग 5V या जरूरत के हिसाब से नियंत्रित करता है। अगर ऐसा न हो, तो मोबाइल की बैटरी खराब हो सकती है या फोन डैमेज हो सकता है।
चार्जर में कई सुरक्षा फीचर्स होते हैं, जैसे ओवर-वोल्टेज प्रोटेक्शन, ओवर-करंट प्रोटेक्शन और शॉर्ट सर्किट से बचाव। ये फीचर्स यह सुनिश्चित करते हैं कि मोबाइल सुरक्षित तरीके से चार्ज हो और किसी तरह का नुकसान न हो।
आप सोच सकते हैं कि अगर मोबाइल DC पर चलता है, तो घरों में सीधे DC सप्लाई क्यों नहीं होती। दरअसल, AC बिजली को लंबी दूरी तक ट्रांसमिट करना आसान और सस्ता होता है। इसलिए पावर प्लांट से घरों तक AC ही भेजी जाती है, और फिर जरूरत के हिसाब से उसे DC में बदला जाता है।
तो कुल मिलाकर, हम चार्जर को AC में इसलिए लगाते हैं क्योंकि घरों में AC सप्लाई ही उपलब्ध होती है।