धार्मिक मान्यताओं अनुसार कल्कि भगवान का जन्म कलयुग के अंत में होगा। ये भगवान विष्णु का अंतिम अवतार होगा। कहते हैं जब धरती पर पाप बहुत बढ़ जाएगा तब भगवान कल्कि प्रकट होंगे। अग्नि पुराण के 16वें अध्याय में भगवान विष्णु के इस अवतार को तीर कमान लिए हुए एक घुड़सवार के रूप में दिखाया गया है। चलिए जानते हैं पुराणों में कल्कि अवतार के बारे में क्या लिखा है।
शास्त्रों अनुसार कलियुग 432000 वर्ष का है और अभी इसका प्रथम चरण ही चल रहा है। पुराणों अनुसार भगवान कल्कि कलियुग के अंतिम चरण में प्रकट होंगे। मान्यता है कि उनके इस अवतार के बाद एक नए युग का प्रारंभ होगा।
जब धरती पर बुराई और पाप चरम सीमा पर होंगे। लोग अपने सुख के लिए एक-दूसरे को मारने लगेंगे। तब दुष्टों का नाश करने के लिए भगवान कल्कि का जन्म होगा। मान्यता अनुसार इस अवतार के बाद एक नए युग का प्रारंभ होगा।
श्रीमद्भागवत-महापुराण के 12वे स्कंद के अनुसार कल्कि अवतार का जन्म संभल ग्राम में होगा। माना जा रहा है ये संभल गांव उत्तर प्रदेश का होगा।
श्रीमद्भागवत-महापुराण के 12वे स्कंद के अनुसार कल्कि अवतार के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। कल्कि भगवान कम उम्र में ही वेदादि शास्त्रों का पाठ करके महापण्डित हो जाएंगे। इसके बाद वे भगवान शिव की तपस्या करके अस्त्रविद्या प्राप्त करेंगे। (फोटो क्रेडिट- pinterest.com)
कल्कि पुराण अनुसार कल्कि अवतार का विवाह बृहद्रथ की पुत्री पद्मादेवी के साथ होगा। लेकिन कुछ कथाओं में भगवान कल्कि के दो विवाह का जिक्र मिलता है। जिसमें इनकी पहली पत्नी माता लक्ष्मी स्वरूप पद्मा होंगी और दूसरी पत्नी माता वैष्णो का शक्तिरूप रमा होंगी।
पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान कल्कि के तीन भाई सुमन्त, प्राज्ञ और कवि होंगे। भगवान अपन भाइयों के साथ मिलकर ही धर्म की स्थापना करेंगे।
भगवान कल्कि के परिवार में उनकी दो पत्नियों पद्मा और रमा के अलावा उनके 4 पुत्र भी होंगे। जिनके नाम जय, विजय, मेघवाल और बलाहक हैं।