जब प्रेम विवाह की बात आती है तो हम भगवान शिव और माता पार्वती की लव स्टोरी को कैसे भूल सकते हैं। ये ऐसी प्रेम कहानी है जो आज भी लोगों के दिलों में रची-बसी हुई है और हर साल महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर इस कहानी को जरूर सुना-सुनाया जाता है। चलिए जानते हैं शिव-शक्ति के प्रेम विवाह की कथा।
हर कोई चाहता है कि उनका वैवाहिक जीवन शिव-पार्वती की तरह सुखमय हो। तभी तो सुखी वैवाहिक जीवन के लिए लोग शिव परिवार की उपासना करते हैं।
पौराणिक कथाओं अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। पिछले जन्मे में वे हीं शिव की पत्नी सती थीं।
जहां एक तरफ माता सती के पिता प्रजापति दक्ष भगवान शिव को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे वहीं दूसरी तरफ माता सती शिव के प्रेम में इस तरह से डूबीं कि वो अपना सबकुछ भूल चुकीं थीं। अंत में उनके पिता को उनका विवाह शिव से करना पड़ा।
देवी सती अपने पति यानी भगवान शिव से इतना प्रेम करती थीं कि जब उनके पिता ने शिव का अपमान किया तो ये वो सहन नहीं कर पायीं और उन्होंने आत्मदाह कर डाला।
अगले जन्म में देवी सती ने माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और इस जन्म में उन्होंने फिर से शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की। पार्वती के इस अटूट प्रेम के आगे शिव जी का दिल पिघल गया और अंत में दोनों ने विवाह रचाया। जिस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था उस दिन ही हर साल महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। (नोट- इस स्टोरी की फोटोज pinterest.com से ली गई हैं)