शास्त्रों में वर्णित है दुनिया के पहले प्रेम विवाह की तारीख, हर साल इस तिथि पर मनाया जाता है हिंदुओं का प्रमुख त्योहार

Duniya Ki Pehli Love Marriage Kiski Hui Thi: जिस दिन ये प्रेम विवाह हुआ था उस दिन को सनातन धर्म के लोग बेहद पवित्र मानते हैं और हर साल इसे पर्व के रूप में बड़ी ही धूमधाम से सेलिब्रेट भी करते हैं। चलिए जानते हैं दुनिया की पहली लव मैरिज के बारे विस्तार से यहां।

Authored by: लवीना शर्माUpdated Feb 14 2025, 06:49 IST
ये है दुनिया की पहली लव मैरिजImage Credit : Pinterest.com01 / 06

ये है दुनिया की पहली लव मैरिज

जब प्रेम विवाह की बात आती है तो हम भगवान शिव और माता पार्वती की लव स्टोरी को कैसे भूल सकते हैं। ये ऐसी प्रेम कहानी है जो आज भी लोगों के दिलों में रची-बसी हुई है और हर साल महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर इस कहानी को जरूर सुना-सुनाया जाता है। चलिए जानते हैं शिव-शक्ति के प्रेम विवाह की कथा।

शिव-पार्वती की प्रेम कहानीImage Credit : Pinterest.com02 / 06

शिव-पार्वती की प्रेम कहानी

हर कोई चाहता है कि उनका वैवाहिक जीवन शिव-पार्वती की तरह सुखमय हो। तभी तो सुखी वैवाहिक जीवन के लिए लोग शिव परिवार की उपासना करते हैं।

शिव को पाने के लिए की कठोर तपस्याImage Credit : Pinterest.com03 / 06

शिव को पाने के लिए की कठोर तपस्या

पौराणिक कथाओं अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। पिछले जन्मे में वे हीं शिव की पत्नी सती थीं।

पिछले जन्म में भी थीं शिव की अर्धांगिनीImage Credit : Pinterest.com04 / 06

पिछले जन्म में भी थीं शिव की अर्धांगिनी

जहां एक तरफ माता सती के पिता प्रजापति दक्ष भगवान शिव को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे वहीं दूसरी तरफ माता सती शिव के प्रेम में इस तरह से डूबीं कि वो अपना सबकुछ भूल चुकीं थीं। अंत में उनके पिता को उनका विवाह शिव से करना पड़ा।

पिछले जन्म में अधूरी रह गई थी इनकी प्रेम कहानीImage Credit : Pinterest.com05 / 06

पिछले जन्म में अधूरी रह गई थी इनकी प्रेम कहानी

देवी सती अपने पति यानी भगवान शिव से इतना प्रेम करती थीं कि जब उनके पिता ने शिव का अपमान किया तो ये वो सहन नहीं कर पायीं और उन्होंने आत्मदाह कर डाला।

फिर शिव-पार्वती हुए एकImage Credit : Pinterest.com06 / 06

फिर शिव-पार्वती हुए एक

अगले जन्म में देवी सती ने माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और इस जन्म में उन्होंने फिर से शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की। पार्वती के इस अटूट प्रेम के आगे शिव जी का दिल पिघल गया और अंत में दोनों ने विवाह रचाया। जिस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था उस दिन ही हर साल महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। (नोट- इस स्टोरी की फोटोज pinterest.com से ली गई हैं)

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