Ayodhya Ram Mandir Trust: राम मंदिर दान चोरी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दूसरी बैठक समाप्त हो गई है। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने कहा कि राम मंदिर के धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए ट्रस्ट द्वारा गठित समिति में अयोध्या के 5 संत और 4 बाहरी सदस्य शामिल हैं। वहीं, ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट प्राप्त न होने के कारण सीईओ की नियुक्ति पर कोई चर्चा नहीं हुई।
सीईओ के चयन की अवधि एक महीने के लिए बढ़ी
राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा है कि कई आवेदन प्राप्त होने के कारण सीईओ के चयन की अवधि एक महीने के लिए बढ़ा दी गई है। वहीं, आज अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने कहा है कि मंदिर के धर्म कार्य का भार और दायित्व अयोध्या के संतों को सौंपा जा रहा, अयोध्या से पांच नाम शामिल हैं। प्रेस कांफ्रेंस में गोविंद गुरू ने कहा, आज हम लोगों ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया है। हम मंदिर का सारा धर्म कार्य का भार दायित्व अयोध्या के संतों को सौंप रहे हैं। इसको आप ध्यान में लीजिएगा।
समिति में अयोध्या से पांच नाम
उन्होंने कहा, यह धार्मिक समिति जो बनी है उसमें अयोध्या से पांच नाम हैं। पहला पूज्य महंत श्री कमल नयन दास जी महाराज, मणिराम छावनी से। स्वामी श्री रामानंद दास जी महाराज, रामकथा कुंज। स्वामी श्री राजकुमार दास जी महाराज, रमा वल्लभा कुंज। स्वामी श्री मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज और हमारे स्वामी श्री दीनेंद्र दास जी महाराज निर्मोही अखाड़े के ये न्यास में भी है और अयोध्या के हैं
इसलिए ये अयोध्या के पांच संत इसके पश्चात यहां की सारी धार्मिक क्रियाकलापों के अधिकारी होंगे इस बात को ध्यान में लीजिए। इस समिति के अंतर्गत नियमानुसार ट्रस्ट की ओर से न्यास की ओर से पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज हैं। युगपुरुष पूज्य श्री परमानंद स्वामी जी महाराज हैं।
