यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर ने मंगल ग्रह की एक अद्भुत तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में 'यूमेनाइड्स डोर्सम' (Eumenides Dorsum) पर्वत के पास अजीबोगरीब आकृत्तियां नजर आ रही हैं। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
मंगल ग्रह पर 'यूमेनाइड्स डोर्सम' पर्वत के पास रेत और चट्टानों पर बनी लंबी लकीरें और खांचे दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें विज्ञानी भाषा में यार्डेंग (Yardangs) कहा जाता है। यह लकीरें और खांचे इस बात का सबूत हैं कि रेड प्लैनेट की सतह महज ज्वालामुखियों और गड्ढों से ही नहीं बनी है। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
रेड प्लैनेट पर भूगर्भीय घटनाएं बहुत धीमी गति से होती हैं। जब तेज हवाएं चलती हैं तो वह रेत के कणों में हवा में उछालती हैं, जो सतह पर मौजूद चट्टानों से बार-बार टकराते हैं। सदियों तक चलने वाली ऐसी प्रक्रियाओं की वजह से ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी ने सतह पर आकृत्तियां बनाई गई हों। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
पहली बार देखने पर ऐसा लगता है जैसे आकृत्तियां समुद्र के किनारे रेत पर बनी छोटी लहरों जैसी हो, लेकिन असल में मार्स एक्सप्रेस द्वारा कैद किया गया यह दृश्य बेल्जियम जितने बड़े इलाके को कवर करता है। जिसकी मतलब साफ है कि 'रेत की लहरें' मीलों लंबी और विशालकाय संरचनाएं हैं। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
रेड प्लैनेट का यह नजारा 'यूमेनाइड्स डोर्सम' पहाड़ी के उत्तरी छोर का है, जो 'मेडुसा फोसा फॉर्मेशन' (Medusae Fossae Formation) का हिस्सा है। यह क्षेत्र मंगल के विशालकाय ज्वालामुखी क्षेत्र 'थार्सिस' (Tharsis) के पास मौजूद है। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पहले ज्वालामुखी फटे और लावा एकत्रित हुआ। इसके बाद हवाओं ने धीरे-धीरे सतह को काटकर आकृत्तियां बनाईं। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)
पृथ्वी से औसतन 22 करोड़ किलोमीटर दूर मौजूद मंगल ग्रह वैज्ञानिकों को नए-नए शोध करने के लिए लुभाता है। वहां पर तो मानव बस्तियां बनाने के भी सपने देखे जा चुके हैं और हाल ही में नासा के मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने मंगल के सतह की एक लाखवीं तस्वीर कैप्चर की थी। (फोटो साभार: ESA/DLR/FU Berlin)