दुनिया के वो दो देश, जो लड़ रहे हैं गुब्बारों से जंग; छोड़े गए 7000 हजार से ज्यादा बैलून

दुनिया में जंग हथियारों से लड़ा जाता है, ऐसा इतिहास से लेकर वर्तमान तक में होते आया है। आज जहां रूस-यूक्रेन आधुनिक हथियारों से जंग लड़ रहे हैं, वहीं दुनिया में दो देश ऐसे भी हैं, जो हथियारों के बजाय बैलूनों से लड़ रहे हैं। एक-एक दिन में हजारों बैलून छोड़े जा रहा हैं। इन बैलूनों में कोई बारूद या हथियार नहीं होता बल्कि कचरे भरे होते हैं। ये बैलून कहीं भी किसी भी वक्त जा गिरते हैं, जिसमें बड़े से बड़े अधिकारियों और नेताओं का भी घर शामिल है। एक देश बैलून छोड़ता है तो दूसरा उसके विरोध में म्यूजिक और पैम्फलेट फेंकता है।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Nov 18 2024, 19:09 IST
कहां हो रही है बैलून से लड़ाईImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay01 / 07

कहां हो रही है बैलून से लड़ाई

इन बैलूनों से लड़ाई नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया के बीच हो रही है। दोनों देश एक दूसरे के जानी दुश्मन है। एक दूसरे के खिलाफ काम करते रहते हैं। अब नॉर्थ कोरिया ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ एक अलग तरीके से ही जंग लड़ना शुरू किया है। उत्तर कोरिया रह रह कर कचरों से भरे बैलून को दक्षिण कोरिया में गिरा रहा है।

छोड़े गए 7 हजार बैलूनImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay02 / 07

छोड़े गए 7 हजार बैलून

उत्तर कोरिया ने तीन सप्ताह के अंतराल के बाद सोमवार की सुबह गुब्बारा अभियान फिर से शुरू किया। उत्तर कोरिया ने मई के अंत से अब तक सीमा पार कचरे से भरे 7,000 से अधिक गुब्बारे भेजे हैं। दक्षिण कोरियाई सेना ने सोमवार को कहा कि प्योंगयांग लगातार कचरे से भरे गुब्बारे भेज रहा है। बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया ने हद पार कर दी है और उसे हमारी धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।

राष्ट्रपति आवास तक में गिर चुके हैं बैलूनImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay03 / 07

राष्ट्रपति आवास तक में गिर चुके हैं बैलून

उत्तर कोरिया से छोड़े गए ये बैलून दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के कम्पाउंड तक में गिर चुके हैं। पिछले महीने कुछ गुब्बारे, जिनमें राष्ट्रपति यूं सुक येओल और प्रथम महिला किम कीन ही की आलोचना करने वाले पत्र शामिल थे, प्रेसिडेंशियल कंपाउंड में उतरे थे।

नॉर्थ कोरिया क्यों छोड़ रहा है गुब्बारेImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay04 / 07

नॉर्थ कोरिया क्यों छोड़ रहा है गुब्बारे

दक्षिण कोरिया में कार्यकर्ताओं की सीमा पार भेजे गए प्योंगयांग विरोधी प्रचार पत्रकों के जवाब में उत्तर कोरिया ने गुब्बारे भेजने शुरू किए थे। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर तीन बार ड्रोन का इस्तेमाल करके प्योंगयांग के ऊपर प्रचार पत्रक गिराने का आरोप लगाया और धमकी दी कि अगर ऐसा दोबारा हुआ तो सैन्य जवाबी कार्रवाई की जाएगी। दक्षिण कोरिया ने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है कि उसने ड्रोन भेजे थे या नहीं, लेकिन चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा को ख़तरा हुआ तो उत्तर कोरिया को अपने शासन का अंत झेलना पड़ेगा।

शीत युद्ध की याद दिला रहा है ये गुब्बारा वॉरImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay05 / 07

शीत युद्ध की याद दिला रहा है ये गुब्बारा वॉर

उत्तर कोरिया का ये गुब्बारा युद्ध, शीत युद्ध की याद दिला रहा है। जब अमेरिका और सोवियत संघ की लड़ाई में दुनिया लगभग दो हिस्सों में बंट गई थी। सालों बाद अब उत्तर कोरिया ने शीत युद्ध शैली के मनोवैज्ञानिक अभियान को फिर से शुरू करते हुए मई के अंत से दक्षिण कोरिया में प्लास्टिक और कागज़ के कचरे जैसे कचरे से भरे बैग ले जाने वाले हज़ारों गुब्बारे भेजे हैं।

नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया कई बार लड़ चुके हैं जंगImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay06 / 07

नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया कई बार लड़ चुके हैं जंग

उत्तर और दक्षिण कोरिया कई बार जंग लड़ चुके हैं। जिसमें कोरियाई युद्ध (1950-1953) और सिम्बा विद्रोह (1964) प्रमुख है। कोरियाई युद्ध में उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप को साम्यवादी शासन के तहत फिर से एकीकृत करने के लिए 25 जून, 1950 को दक्षिण कोरिया पर आक्रमण किया था। युद्ध 1953 में एक गतिरोध पर समाप्त हुआ, जब कोरियाई विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) ने दोनों देशों को अलग कर दिया। सिम्बा विद्रोह में उत्तर कोरिया और उसके सहयोगियों ने 1964 में सिम्बा विद्रोहियों को हराया था।

जंग के मुहाने में नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरियाImage Credit : AP/wikimedia commons/ Pixabay07 / 07

जंग के मुहाने में नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया

नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया एक बार फिर से जंग के मुहाने पर दिख रहे हैं। उत्तर कोरिया आज की तारीख में परमाणु हथियारों से लैस है और उसके पास रूस और चीन का भी समर्थन हासिल है। वहीं साउथ कोरिया की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है और उसके साथ अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश खड़े हैं।

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