अक्टूबर 2024 में चिन्मय कृष्णा दास पर एक रैली में देश के झंडे के अपमान का आरोप लगाते हुए देशद्रोह का आरोप लगाया गया और इसी महीने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जिसके बाद हिंदुओं में रोष फैल गया। पेशी के वक्त अदालत के बाहर उनके समर्थक भारी संख्या में जुटे और इसी दौरान एक सरकारी वकील की हत्या भी हो गई। इससे मामला और उलझ गया और पुलिस ने उनके समर्थकों की धरपकड़ शुरू कर दी।
हाल ही में 'बांग्लादेश सनातन जागरण मंच' और 'बांग्लादेश सम्मिलित शंख लघु जोत' का विलय हुआ था। दोनों ने मिलकर 'बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत' नाम का संगठन बनाया। चिन्मय कृष्ण दास को इस नए संगठन का प्रवक्ता बनाया गया था।
चिन्मय दास इस्कॉन चटगांव के पुंडरीक धाम के अध्यक्ष भी हैं। वह बांग्लादेश में चटगांव के रहने वाले हैं। वह एक आश्रम भी चलाते हैं और हिंदू बच्चों को शिक्षा और अन्य सामाजिक सेवा के काम से भी जुड़े हैं। वह बांग्लादेश में हिंदुओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। (DD News/X)
5 अगस्त यानी शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद चिन्मय कृष्ण दास चर्चा में आए थे। चिन्मय दास अगस्त से बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकार और उन पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ रैलियां करते रहे हैं। बांग्लादेश के मेहरपुर स्थित इस्कॉन मंदिर पर हमले को लेकर चिन्मय प्रभु ने हिंदू मंदिरों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई थी उन्होंने कहा था कि चटगांव में तीन मंदिर खतरे में हैं, लेकिन हिंदू समुदाय ने मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के साथ मिलकर अब तक उन्हें बचाया है। (Photo- X)
उन्होंने हाल ही में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ दो-तीन बड़ी रैलियां की थीं, जिसमें हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। इससे वह नई सरकार के निशाने पर आ गए। उन पर बांग्लादेश के ध्वज के अपमान का आरोप लगाते हुए देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया। इससे पता चलता है कि चिन्मय दास मो. यूनुस की कार्यवाहक सरकार के निशाने पर थे। (Photo - DD News / X)
चिन्मय दास की गिरफ्तारी का भारत ने भी विरोध जताया और इसे लेकर बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं के अपराधी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन शांतिपूर्ण सभाओं के माध्यम से वैध मांगें उठाने वाले एक धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। इससे बांग्लादेश बिगड़ गया और इसे अपने मामलों में हस्तक्षेप बताया।