रैली की शुरुआत में ही हजारों महिलाएं काली चादरों में लिपटी हुई तेहरान के मुख्य चौराहों पर जमा हुईं। हाथों में ईरान के झंडे और 'अमेरिका पर भरोसा नहीं' के नारे लिखे बैनर लिए इन महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे वार्ता के पक्ष में नहीं हैं।
इस रैली को 'डिवोटेड डॉटर्स ऑफ ईरान' नाम दिया गया था। स्लाइड में दिखाई दे रहा है कि महिलाएं कतारबद्ध होकर शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही हैं। वे अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के 'झुकने वाले' समझौते के खिलाफ हैं।
जब यह रैली एंगेलाब स्ट्रीट (क्रांति सड़क) पहुंची, तो दृश्य ऐतिहासिक था। हजारों महिलाओं की आवाज 'डेथ टू अमेरिका' के नारों के साथ गूंज रही थी। यह क्षेत्र ईरान की क्रांतियों का गवाह रहा है और आज फिर एक नए राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बना।
रैली में शामिल कई महिलाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी विवाद पर अपनी राय रखी। उनका मानना है कि अमेरिका को इस क्षेत्र में दखल देने का कोई हक नहीं है। पोस्टर पर लिखा था, "हमारा समुद्र, हमारा अधिकार।"
पूरी रैली के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से पूरी रैली की निगरानी की जा रही थी। शासन का समर्थन इस रैली को मिलता दिख रहा था, जो अमेरिका पर दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में वार्ता होने की बात कही थी, लेकिन तेहरान की इन महिलाओं का तर्क है कि पिछला अनुभव बताता है कि अमेरिका अपनी बातों से पलट जाता है। वे सरकार से वार्ता की मेज से हटने की मांग कर रही हैं।
गैलरी की अंतिम स्लाइड में महिलाएं राष्ट्रीय हितों की रक्षा की शपथ लेती नजर आ रही हैं। उनका संदेश साफ है, ईरान युद्ध से नहीं डरता, लेकिन वह अपने स्वाभिमान को गिरवी रखकर कोई समझौता भी नहीं करेगा।