देश की करेंसी पर हर कोई दस्तखत नहीं कर सकता है। भारत में ऐसा सौभाग्य महज भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर को ही मिला है।
देश में मौजूद हर एक नोट पर रिजर्व बैंक के गर्वनर के हस्ताक्षर होते हैं। समय के साथ कई गर्वनर बदले और करेंसी पर गर्वनर के सिग्नेचर भी बदले। मौजूदा समय पर संजय मल्होत्रा, जो आरबीआई के गवर्नर हैं, उनके द्वारा साइन किए हुए नोट जारी होते हैं।
प्रधानमंत्री बनने से पहले मनमोहन सिंह आरबीआर के गवर्नर रह चुके हैं। उन्होंने 1982 से लेकर 1985 तक आरबीआई के गवर्नर का पद संभाला। इस दौरान जारी होने वाली तमाम करेंसी में मनमोहन सिंह के सिग्नेचर ही देखने को मिलेंगे।
एक रुपये के नोट पर रिजर्व बैंक के गर्वनर के नहीं, बल्कि वित्त सचिव के दस्तखत होते हैं। ऐसे में जब मनमोहन सिंह वित्त सचिव थे तो उनके समय में एक रुपये के नोट भी प्रकाशित हुए थे।
महज एक रुपये के नोट को छोड़ दिया जाए तो बाकी तमाम नोटों पर गवर्नर के दस्तखत अनिवार्यतौर पर होते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के मुताबिक, देश में करेंसी प्रबंधन का जिम्मा आरबीआई को सौंपा गया है। आरबीआई अधिनियम की धारा 22 करेंसी जारी करने का अधिकार प्रदान करती है।
महज एक रुपये के नोट को जारी करने का अधिकार आरबीआई के पास नहीं होता है। इसका जिम्मा वित्त मंत्रालय को सौंपा गया है। तभी तो एक रुपये के नोट पर मंत्रालय के सचिव के दस्तखत नजर आते हैं और बाकी दो रुपये और उससे बड़े नोटों पर आरबीआई गवर्नर के ही दस्तखत होते हैं।