यही वजह है कि रॉ नाम से इसका कोई दफ्तर आपको नहीं मिलेगा न कोई साइनबोर्ड। इतना जरूर है कि नई दिल्ली में इसका मुख्यालय है। R&AW के प्रमुख को कैबिनेट सचिवालय में सचिव (अनुसंधान) के रूप में नामित किया गया है। रॉ चीफ सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है।
गूगल में भी सर्च करने पर इसका हेडक्वार्टर दिल्ली ही बताएगा, इससे अधिक जानकारी नहीं मिलेगी। किस फ्लोर और किस बिल्डिंग में ये स्थित है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इससे पता चलता है कि रॉ कितने गुप्त तरीके से काम करती है।
रॉ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बंदूक नहीं मिलती। बचाव के लिए ये अपनी तेज बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं। रॉ एजेंट बनने के लिए अलग से परीक्षा नहीं होती, पुलिस सेवा से ही कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता है।
रॉ अपनी रिपोर्ट सीधे देश के प्रधानमंत्री को भेजती है। इसके डायरेक्टर का चुनाव सेक्रेटरी (रिसर्च) द्वारा होता है। अगर कोई RAW का कर्मचारी है तो उसे यह बात पूरी तरह गुप्त रखनी होती है कि वह RAW के लिए काम करता है।
रॉ पर आर.टी.आई. (RTI) नहीं डाल सकते, क्योंकि यह एजेंसी देश की सुरक्षा से जुड़ी है। रॉ का सिद्धांत है- धर्मो रक्षति रक्षितः, जिसका मतलब है- जो शख्स धर्म की रक्षा करता है, वह हमेशा सुरक्षित रहता है।
अगर आपने इस एजेंसी के बारे में खबरों में या कहीं और ज्यादा कुछ नहीं सुना है, तो आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि यह वास्तव में कितना गुप्त है और इसके काम करने के तरीके क्या हैं। एक जासूस के राज उसकी मौत के साथ ही दफन हो जाते हैं। यहां तक कि उसकी पत्नी तक नहीं पता होता कि उसका पति एक रॉ एजेंट हैं।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से तुलना करें तो रॉ को किसी तरह की गिरफ़्तारी करने का अधिकार नहीं है। न ही ये आधी रात को दस्तक देता है, रॉ देश के अंदर भी जासूसी नहीं करता जबकि आईएसआई ये सब करती है। रॉ देश के प्रधानमंत्री के प्रति जवाबदेह है जबकि आईएसआई सेनाध्यक्ष को रिपोर्ट करती है।