अपनी रेंज से दुश्मनों की नींद उड़ा देगी ASTRA MK-III, ताकत की नई गाथा लिखेगी DRDO की यह मिसाइल

What is Astra Mk 3 Gandiva missile : मिसाइल ट्रेक्नॉलजी (Missile Trachnology) में भारत लगातार नई बुलंदियां छू रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अब तक की अपनी उपलब्धियों से भारत को जटिल एवं उन्नत मिसाइल ट्रेक्नॉलजी रखने वाले देशों में शुमार कर दिया है। अब सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक के सफल परीक्षण ने भारत के मिसाइल प्रोग्राम (India Missile Programme) को और ताकत दे दी है। इस तकनीक के जरिए DRDO अब हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का विकास तेजी से करेगा। DRDO पहले ही अस्त्र (Astra) सीरीज की मिसाइलें पर काम कर रहा है। अस्त्र मार्क-1 बन चुकी है जबकि मार्क-2 विकसित की जा रही है। ये वियोंड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें हैं। (तस्वीर-X/@lca_tejas_)

Produced by: आलोक कुमार रावUpdated Feb 6 2026, 10:45 IST
अस्त्र मार्क-1, मार्क-2 से ज्यादा होगी ताकतवरImage Credit : Twitter01 / 07

अस्त्र मार्क-1, मार्क-2 से ज्यादा होगी ताकतवर

SFDR तकनीक इसलिए खास है क्योंकि अब तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों अस्त्र मार्क-1 और मार्क-2 में पारंपरिक सॉलिड रॉकेट मोटर्स लगे हैं। समझा जाता है कि मार्क-2 की मारक क्षमता 200 किलोमीटर की होगी। लेकिन SFDR तकनीक वाली अस्त्र मिसाइल अपने पहले के संस्करणों से ज्यादा दूरी तक मार करेगी। मार्क-3 की रफ्तार भी काफी ज्यादा होगी। तस्वीर-X/@A1rM4rsh411

350 किलोमीटर तक हो सकती है अस्त्र मार्क-3 की रेंजImage Credit : Twitter02 / 07

350 किलोमीटर तक हो सकती है अस्त्र मार्क-3 की रेंज

रिपोर्टों में कहा गया है कि SFDR तकनीक के बाद भारत अब अस्त्र मिसाइल के अगले संस्करण Astra Mk-3 जिसे गांडीव (Gandiva) कहा जा रहा है, इस पर तेजी से काम शुरू करेगा। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक SFDR तकनीक अस्त्र मार्क-3 में लगेगी। बताया जा रहा है कि अस्त्र मार्क-3 की मारक क्षमता 350 किलोमीटर तक की हो सकती है। (तस्वीर-X/@A1rM4rsh411)

​लॉन्च के बाद लॉक-ऑन क्षमता प्रदान करता हैImage Credit : Twitter03 / 07

​लॉन्च के बाद लॉक-ऑन क्षमता प्रदान करता है

ड्यूल-फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन, जो समुद्र तल से लेकर ऊंचाई वाले इलाकों तक लॉन्च की सुविधा देता है और निरंतर सुपरसोनिक गति (मैक 4.5+) बनाए रखता है। अस्त्र मार्क-3 को बीवीआर से AWACS, टैंकर और रणनीतिक बॉम्बर जैसे अहम लक्ष्यों को निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे से लैस, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेज़र्स (ECCM) और लॉन्च के बाद लॉक-ऑन (LOAL) क्षमता प्रदान करता है। तस्वीर-X/@DefenceDecode

मिसाइल स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदमImage Credit : Twitter04 / 07

मिसाइल स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम

अस्त्र मार्क-3 मिसाइल हाई-एंगल अटैक, स्नैप-अप/स्नैप-डाउन एंगेजमेंट (±10 किमी ऊँचाई), 0.8 से लेकर मैक 4 से अधिक की गति पर लक्ष्य भेदन में सक्षम है। इसे Su-30MKI और तेजस सहित भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों पर तैनाती किया जा सकता है। यह मिसाइल भारत की रक्षा स्वदेशीकरण दिशा में बड़ा कदम है, और यह आयात पर निर्भरता कम करने वाली है। तस्वीर-X/@InsightGL

अस्त्र मार्क-3 से कई गुना बढ़ जाएगी IAF की ताकतImage Credit : Twitter05 / 07

अस्त्र मार्क-3 से कई गुना बढ़ जाएगी IAF की ताकत

अस्त्र मार्क-3 भारतीय वायु सेना की ताकत कई गुना बढ़ा देगी। यह चीन की PL-15 जैसी मिसाइलों को चुनौती देगी। यह मिसाइल IAF के विमानों को कहीं अधिक सुरक्षित स्टैंड-ऑफ दूरी से दुश्मन लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता देगी। फाइटर प्लेन के पायलट काफी दूरी से दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकेंगे। तस्वीर-X/@Kuntal__biswas

एसएफडीआर प्रौद्योगिकी की रक्षा मंत्री ने की सराहनाImage Credit : Twitter06 / 07

एसएफडीआर प्रौद्योगिकी की रक्षा मंत्री ने की सराहना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एसएफडीआर प्रौद्योगिकी के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ और उद्योग जगत की सराहना की। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस सफल प्रदर्शन ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है जिनके पास यह प्रौद्योगिकी है, जो लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को विकसित करने में सक्षम बनाती है, जिससे प्रतिद्वंद्वियों पर सामरिक बढ़त हासिल होती है। तस्वीर-X/@Kuntal__biswas

पूरी तरह से मानकों पर खरा उतरा SFDRImage Credit : Twitter07 / 07

पूरी तरह से मानकों पर खरा उतरा SFDR

डीआरडीओ का कहना है कि परीक्षण के दौरान SFDR पूरी तरह से मानकों पर खरा उतरा और इसने सभी वांछित उद्देश्यों को पूरा किया। रैमजेट इंजन वाली मिसाइलें काफी शक्तिशाली और इनका प्रभाव बहुत ज्यादा होता है। ये मिसाइलें काफी दूरी पर स्थित लक्ष्य या ठिकाने को निशाना बना सकती हैं। तस्वीर-X/@kirtimukha108

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