हमें लगता है कि हम तो हल्का फुल्का मजाक कर रहे हैं, लेकिन ये नहीं सोचते कि जिस बात पर हम हंस रहे हैं, वही बात दूसरे को चुभ सकती है। खासकर जब मजाक उसकी किसी कमजोरी, पुराने दर्द या असुरक्षा से जुड़ा हो। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जाने-अनजाने में भी पार्टनर से इस तरह के मजाक नहीं करने चाहिए:
शादी के बाद बदलते शरीर को लेकर की गई बातें अक्सर हंसी में कही जाती हैं। लेकिन इन्हें सुनने वाला इन्हें उतनी आसानी से नहीं लेता। बाहर के किसी व्यक्ति की बात को नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन जीवनसाथी की कही बात ज्यादा असर करती है। बार-बार ऐसे मजाक होने पर व्यक्ति अपने ही रूप-रंग को लेकर असहज महसूस कर सकता है।
किसी पुराने झगड़े, गलती या एक्स पार्टनर का नाम लेकर मजाक करना भी रिश्ते के लिए ठीक नहीं। कहने वाले को लग सकता है कि वह सिर्फ हंसी कर रहा है, लेकिन सामने वाले को ऐसा महसूस हो सकता है कि उसकी पुरानी बात आज भी भूली नहीं गई।
अकेले में कही गई कोई बात शायद उतनी बुरी न लगे, लेकिन वही बात दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने कही जाए तो उसका असर अलग हो सकता है।
खाना बनाने, आदतों, कमियों या किसी पुरानी गलती को लेकर सबके सामने मजाक उड़ाने से साथी को शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। ऐसे समय में वह न तो खुलकर विरोध कर पाता है और न ही आसानी से हंस पाता है।
“एक दिन तुम्हें छोड़ दूंगा” या “तलाक ले लेंगे” जैसी बातें कई लोग गुस्से या मजाक में कह देते हैं। लेकिन रिश्ते को लेकर असुरक्षित महसूस करने वाले व्यक्ति के लिए ऐसी बात मजाक नहीं लगती। उसे रिश्ते की स्थिरता पर संदेह होने लग सकता है। खासकर पहले से तनाव चल रहा हो तो ऐसी बातें डर और बेचैनी बढ़ा सकती हैं।
किसी दूसरे पति-पत्नी से खाना, कमाई, बच्चों की परवरिश या आदतों की तुलना करना भी चोट पहुंचा सकता है। मजाक के अंदाज में कही गई तुलना सामने वाले को यह महसूस करा सकती है कि वह अपने साथी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा। रिश्ता साझेदारी है, प्रतियोगिता नहीं। इसलिए हंसी ऐसी होनी चाहिए जिसमें दोनों साथ हंसें, किसी एक पर नहीं।