गर्मियों में शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ा टास्क बन जाता है। तेज धूप, पसीना और पेट में बढ़ती गर्मी लोगों को परेशान करने लगती है। ऐसे मौसम में कई लोग दूध पीना तो चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं पाते कि ठंडा दूध ज्यादा फायदेमंद है या गर्म। किसी को लगता है फ्रिज का दूध शरीर को कूल रखता है, तो कोई गर्म दूध को हेल्दी मानता है। सच यह है कि दोनों के अपने फायदे हैं, बस उन्हें सही तरीके और सही समय पर पीना जरूरी है।
जब शरीर गर्मी से परेशान होता है, तब ठंडा दूध काफी सुकून दे सकता है। यह पेट की जलन और एसिडिटी को कम करने में मदद करता है। बाहर से घर आने के बाद अगर सामान्य ठंडक वाला दूध पिया जाए, तो शरीर को अंदर से राहत महसूस हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग गर्मियों में ठंडा दूध पीना पसंद करते हैं। हालांकि बहुत ज्यादा बर्फ डालकर दूध पीना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे गला और पाचन दोनों बिगड़ सकते हैं।
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि गर्मियों में गर्म दूध नहीं पीना चाहिए। हल्का गुनगुना दूध खासकर रात के समय फायदेमंद माना जाता है। इससे शरीर रिलैक्स होता है और नींद भी अच्छी आ सकती है। जिन लोगों को ठंडी चीजें जल्दी नुकसान करती हैं या जिनका गला संवेदनशील रहता है, उनके लिए हल्का गर्म दूध बेहतर ऑप्शन हो सकता है।
अगर पेट में जलन, एसिडिटी या गर्मी ज्यादा महसूस होती है, तो ठंडा दूध ज्यादा आराम दे सकता है। सादा और बिना ज्यादा चीनी वाला दूध पेट को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन हर किसी की बॉडी अलग होती है। कुछ लोगों को दूध पीने के बाद गैस या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में अपनी बॉडी की जरूरत को समझना जरूरी है।
गर्मी में दूध पीते समय सिर्फ तापमान नहीं, टाइमिंग भी जरूरी होती है। तेज धूप से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडा दूध पीना नुकसान कर सकता है। वहीं रात में सोने से पहले हल्का गुनगुना दूध शरीर को आराम देने का काम करता है। अगर सुबह दूध पी रहे हैं, तो सामान्य तापमान वाला दूध ज्यादा बेहतर माना जाता है।
गर्मियों में दूध हमेशा ताजा और सही तरीके से रखा हुआ होना चाहिए। ज्यादा देर बाहर रखा दूध खराब हो सकता है और पेट की दिक्कत बढ़ा सकता है। साथ ही जरूरत से ज्यादा चीनी या फ्लेवर मिलाकर दूध पीने से उसका हेल्दी असर कम हो सकता है। बेहतर यही है कि दूध को संतुलित मात्रा में और अपनी बॉडी के हिसाब से पिया जाए।
प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।