हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाने वाला वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक केवल शिशु के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मां की सेहत पर भी ध्यान दिलाने का अवसर है। आइए जानते हैं कि नियमित स्तनपान कराने से मां को कौन-कौन से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है। यह हार्मोन गर्भाशय को संकुचित करने में मदद करता है, जिससे प्रसव के बाद गर्भाशय तेजी से अपने सामान्य आकार में लौटता है। साथ ही प्रसवोत्तर रक्तस्राव का खतरा भी कम हो सकता है।
कई अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और ओवेरियन कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ भी जहां संभव हो, शिशु को स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।
स्तनपान के दौरान शरीर अतिरिक्त कैलोरी खर्च करता है। संतुलित आहार और हल्की शारीरिक गतिविधि के साथ ब्रेस्टफीडिंग प्रसव के बाद बढ़े वजन को धीरे-धीरे कम करने में सहायक हो सकती है।
बच्चे को स्तनपान कराने से ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोन निकलते हैं, जो मां को शांत महसूस कराने और बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने में मदद करते हैं। इससे तनाव कम हो सकता है और प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य को भी सहयोग मिलता है।
कुछ शोध बताते हैं कि लंबे समय तक स्तनपान कराने वाली महिलाओं में भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है। हालांकि यह लाभ स्वस्थ जीवनशैली के साथ अधिक प्रभावी माना जाता है।
ब्रेस्टफीडिंग केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। त्वचा के संपर्क और आंखों के संवाद से मां और शिशु के बीच विश्वास, सुरक्षा और अपनापन बढ़ता है, जो बच्चे के मानसिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।