भारत का कौन सा गांव कहलाता है 'फौजियां का गढ़', हर घर से निकलता है भारत मां का लाल

Fauji wala Gaon : भारत में कई ऐसे गांव हैं, जो अपनी वीरता और सेना में भागीदारी के लिए मशहूर हैं। ऐसा ही एक गांव है, जहां से देश को खूब जवान मिलते रहे हैं। इसे फौजियों का गढ़ यूं ही नहीं कहा जाता है। इस गांव की हवा, मिट्टी और खुशबू में देशभक्ति का एक जज्बा नजर आता है। ये भारत ही नहीं बल्कि एशिया का भी सबसे बड़ा गांव है। चलिये जानते हैं देश के किस कोने में ये फौजियों का गांव स्थित है और देश को जांबाज जवान देने वाले इस गांव की कहानी क्या है...

Authored by: कुसुम भट्टUpdated Feb 22 2026, 08:11 IST
तरक्की में गांवों का योगदानImage Credit : IStock01 / 06

तरक्की में गांवों का योगदान

हमारे देश की अर्थव्यवस्था और तरक्की में गांवों का बहुत अहम योगदान है। यूं ही नहीं कहा जाता कि देश की आत्मा इन्हीं गांवों में बसती है।

12,000 से भी ज्यादा जवानImage Credit : IStock02 / 06

12,000 से भी ज्यादा जवान

मगर एक गांव ऐसा है, जो देश को सबसे ज्यादा फौजी देने के लिए जाना जाता है। इस गांव से इंडियन आर्मी में 12,000 से भी ज्यादा आर्मी के जवान तैनात हैं।

1st World War से अब तक देशसेवा में झुका गांवImage Credit : IStock03 / 06

1st World War से अब तक देशसेवा में झुका गांव

इस गांव की पीढ़ियां प्रथम विश्व युद्ध से लेकर आज तक भारतीय सेना में अपना योगदान देती आ रही हैं। इस गांव से लगभग हर घर से एक सदस्य सेना में रहकर देश की सेवा कर रहा है।

कौन सा गांव ?Image Credit : IStock04 / 06

कौन सा गांव ?

ये गांव है उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित गहमर गांव। इस गांव को फौजियों का गढ़ या फिर सैनिकों का गांव भी कहते हैं। इस गांव की खास सैन्य परंपरा इसे अन्य गांवों से काफी अलग बनाती है।

एशिया का सबसे बड़ा गांवImage Credit : IStock05 / 06

एशिया का सबसे बड़ा गांव

देश को सबसे ज्यादा जवान देने वाला ये गांव एशिया का सबसे बड़ा गांव है। गहमर की मिट्टी, हवा और पानी भी अपने अंदर देशभक्ति की एक भावना समेटे हुए है।

कितनी है आर्मी वाले इस गांव की आबादी ? Image Credit : IStock06 / 06

कितनी है आर्मी वाले इस गांव की आबादी ?

इस गांव की कुल आबादी 1 लाख 20 हजार है। ये 8 वर्ग मील में फैला हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1530 में कुसुम देव राव ने सकरा डीह नामक स्थान पर गहमर गांव को बसाया था। इसी गांव में प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर भी है।

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