भारत संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, यूक्रेन और नेपाल से कम मात्रा में सरसों का तेल आयात करता है। अब सवाल ये है कि अगर इन देशों से बहुत कम मात्रा या यू कहें की नाममात्र यानी 5 से 10 प्रतिशत सरसों का तेल आयात करता है तो फिर भारत में 90 प्रतिशत तेल कहां से आता है।
भारत में 90 प्रतिशत से अधिक सरसों का तेल का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है। जी हां, भारत खुद सरसों के तेल का उत्पादक देश है।
भारत सरसों के तेल के मामले में आत्मनिर्भर देश है। यहां सरसों की खेती की जाती है और उसके बाद उसका तेल निकाला जाता है। सरसों की खेती देश के 10 राज्यों में सबसे अधिक होती है।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, असम, बिहार और पंजाब सरसों की खेती में अव्वल राज्य हैं। यहां पीली-पीली सरसों के फूल लहराते हुए नजर आते हैं।
बता दें कि ऊपर दिए गए 10 देशों में से एक है, जिसका योगदान सरसों के तेल के उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत यानी सबसे अधिक है। वह राज्य है राजस्थान। जी, राजस्थान सरसों के तेल का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
राजस्थान के जिन प्रमुख क्षेत्रों में सरसों की खेती सबसे अधिक होती है वह है भरतपुर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर। इन तीनों इलाकों में सरसों के तेल का सबसे अधिक उत्पादन होता है।
भारत में सरसों का तेल रेपसीड और सरसों के बीजों से निकाला जाता है। निकाले हुए कच्चे तेल की अशुद्धियों को खत्म करने के लिए उसे छाना जाता है फिर बोतलों में भरकर उसका उत्पादन किया जाता है। बता दें कि सरसों का तेल निकालने की प्रमुख विधियों में कच्ची घनी, तेल निक्षेपक और विलायक निष्कर्षण शामिल है।
क्योंकि भारत 90% से अधिक तेल खुद प्रोड्यूस करता है। इसलिए भारत इसका निर्यात भी करता है। भारत से तेल लेने वाले देशों में भूटान, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, कुवैल आदि शामिल है। इसके अलावा भी कई देश हैं, जो भारत से सरसों का तेल लेते हैं।