बता दें एडीएम यानी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जिले के जिला अधिकारी (DM) का सहयोगी होता है। एडीएम को डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति में जिले के प्रशासनिक कामकाज का जिम्मा दिया जाता है।
एडीएम को सीनियर डिप्टी कलेक्टर भी कहा जाता है। एडीएम यानी अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट DM यानी जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर के ठीक बाद होता है।
एडीएम का कार्य जिले की कानून-व्यवस्था पर नजर रखना, एसडीएम और तहसीलों के कामों की समीक्षा करना, बड़े प्रशासनिक फैसलों में DM की सहायता करना व राजस्व, आपदा प्रबंधन, चुनाव और सरकारी आदेशों के पालन की निगरानी करना होता है। साथ ही कुछ मामलों में अपील अधिकारी के रूप में काम करना भी होता है।
वहीं एसडीएम किसी जिले के एक उपखंड या तहसील/सब-डिवीजन का प्रशासन संभालते हैं। एसडीएम का मुख्य कार्य क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भूमि विवाद और राजस्व मामलों को देखभाल करना। इसके अलावा जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी करना व धारा 144 जैसे आदेश लागू करना होता है।
आसान भाषा में कहें तो ADM जिला स्तर का अधिकारी होता है जबकि SDM उपखंड स्तर का अधिकारी होता है। एसडीएम एक निश्चित क्षेत्र या तहसील संभालता है। वहीं एडीएम पूरे जिले के प्रशासनिक मामलों में भूमिका निभाता है।
आपको बता दें कि एडीएम एसडीएम से ज्यादा पावरफुल होता है। क्योंकि ADM का दायरा पूरे जिले का होता है, जबकि SDM सिर्फ एक हिस्से तक सीमित रहता है।