देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित सर्वोच्च न्यायालय में बतौर वकील प्रैक्टिस करना वकालत के हर छात्र का सपना होता है। जिला अदालत और हाईकोर्ट की तुलना में सुप्रीम कोर्ट के वकील बनने की यात्रा कठिन है।
वकील बनने के लिए सबसे पहले तो 12वीं पास वकालत के क्षेत्र में ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके लिए ग्रेजुएशन के बाद 3 साल का LLB कर सकते हैं, जिसमें 3+3= 6 साल लगेंगे। इसके अलावा 12वीं के तुरंत बाद 5 साल का BA LLB या BBA LLB कर सकते हैं।
अपनी लॉ की डिग्री पूरी करने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया में खुद को रजिस्ट्रेशन कराना होता है । भारतीय अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अनुसार कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए किसी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया में AIBE एग्जाम पास करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बाद ही कोई वकील एडवोकेट बन सकता है। उम्मीदवार भारत के किसी भी राज्य की बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए स्वतंत्र हैं, जहां भी वे प्रैक्टिस करना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का वकील बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड परीक्षा (AOR) परीक्षा पास करनी होती है। AOR परीक्षा में आवेदन करने के लिए वकील ने 5 साल का अभ्यास और दो साल का अप्रेंटिसशिप पूरी होनी जरूरी है।
एओआर परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम होते हैं। एओआर परीक्षा में चार पेपर होते हैं। इनके नाम हैं अभ्यास और प्रक्रिया, प्रारूपण, वकालत और व्यावसायिक नैतिकता, और अग्रणी मामले है।