13वीं-14वीं शताब्दी के दौरान इस स्वादिष्ट व्यंजन भारत की जमीन पर पहुंचा था और इसके रूपांतरित रूप को यहां समोसा कहा गया, जिसमें आलू की स्टफिंग की गई।
बता दें कि भारत की गलियों, सड़कों और नुक्कड़ पर जगह-जगह मिलने वाला समोसा, असल में ईरान से आया है। इसकी कहानी और भी दिलचस्प है।
इस फ्राइड फूड को ईरान में 10वीं शताब्दी के दौरान महमूद गजनवी के दरबार में एक शाही पेस्ट्री के तौर पर परोसी जाती थी। उस दौरान इसमें कीमा की स्टफिंग की जाती थी। उस दौरान व्यापार और युद्ध के लिए अन्य देशों में जाने वाले लोग इसे अपने साथ खाने के लिए ले जाते थे और इस प्रकार यह अन्य देशों में भी प्रसिद्ध होने लगा और ईरान से भारत तक का सफर तय किया। बता दें कि कई देशों में इसे पफ पेस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है।
समोसा शब्द की उत्पत्ति फारसी शब्द 'सम्मोकसा' से हुई है। यह ईरानी व्यंजन 'संबुश्क' से प्रेरित है। भारत में इसका बदला हुआ रूप समोसा कहलाता है। जिसमें विभिन्न-विभिन्न प्रकार की फिलिंग की जाती है।
आज के समय में मार्केट में बिकने वाले समोसे केवल आलू के नहीं होते हैं। आज आपको पास्ता समोसा, पनीर, चाउमीन, चिकन, चीज, चॉकलेट, मावा, शाही पनीर, मटर आदि के समोसे खाने को मिल जाएंगे।
कीमा और मावा से बनने वाला यह व्यंजन भारत में आकर आलू वह भारतीय मसालों से मिल गया। भारतीय मसालों का यह तड़का लोगों को इतना भाया कि अब यह देश के सबसे प्रसिद्ध स्नैक्स बना गया है।