ट्रेन में आगे पीछे डबल इंजन क्यों लगाए जाते हैं, ज्यादातर लोगों को नहीं पता

Why Does A Train Have Two Engines: भारत में रोजाना 13000 से अधिक यात्री ट्रेन चलती हैं, जिसमें लाखों की संख्या में लोग सफर करते हैं। ऐसे में अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ ट्रेनों में आगे और पीछे दोनों इंजन लगा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के आगे और पीछे डबल इंजन क्यों लगा होता है। ट्रेन में रोजाना यात्रा करने वाले भी इसका कारण नहीं बता पाए हैं।

Authored by: आदित्य सिंहUpdated Jan 6 2026, 08:52 IST
भारतीय रेलवेImage Credit : Istock01 / 08

भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। ऐसे में आपने भी कभी ना कभी ट्रेन में सफर जरूर किया होगा।

ट्रेन में आगे पीछे डबल इंजन क्यों लगाया जाता हैImage Credit : Istock02 / 08

ट्रेन में आगे पीछे डबल इंजन क्यों लगाया जाता है

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ट्रेन में आगे और पीछे दोनों इंजन क्यों लगा होता है। अगर आप भी नहीं जानते हैं कि ट्रेन के दोनों तरफ इंजन क्यों लगा होता है तो यहां जान लीजिए।

डबल इंजन वाले ट्रेन को क्या कहते हैंImage Credit : Istock03 / 08

डबल इंजन वाले ट्रेन को क्या कहते हैं

बता दें जिन ट्रेनों में डबल इंजन लगाए जाते हैं उसे मल्टीपल यूनिट ऑपरेशन कहा जाता है। यह ट्रेनें ज्यादा वजन खींचने की क्षमता रखती हैं।

इसलिए लगाया जाता है डबल इंजनImage Credit : Istock04 / 08

इसलिए लगाया जाता है डबल इंजन

ट्रेन में डबल इंजन का इस्तेमाल हार्स पावर बढ़ाने के लिए किया जाता है। सामान्य तौर पर इंजन 4000 हार्स पावर से लेकर 8000 हार्स पावर का होता है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने 9000 हार्स पावर का इंजन तैयार किया है।

मालगाड़ी में डबल इंनImage Credit : Istock05 / 08

मालगाड़ी में डबल इंन

इसके अलावा मालगाड़ी में भी कई बार डबल इंजन होता है। हालांकि यह गुड्स पर निर्भर करता है। कहा जाता है कि इन इजनों की क्षमता 4000 से 4500 हॉर्सपावर होती है। ऐसे में डबल इंजन लगने के बाद इनकी पावर 8000 से 9000 हो जाती है।

एक लोको पायलट करता है कंट्रोलImage Credit : Istock06 / 08

एक लोको पायलट करता है कंट्रोल

दो इंजन का मतलब यह नहीं है कि दोनों इंजन में अलग अलग ड्राइवर होते हैं, यहां दोनों इंजन का कंट्रोल एक ही लोकोपायलट के पास होता है। यहां पहले को लीड इंजन और दूसरे को ट्रेल इंजन कहा जाता है।

पहाड़ी इलाकों मेंImage Credit : Istock07 / 08

पहाड़ी इलाकों में

आमतौर पर डबल इंजन का इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों या चढ़ाई वाले रेलवे ट्रैक पर किया जाता है।

कई डबल इंजन वाली ट्रेनImage Credit : Istock08 / 08

कई डबल इंजन वाली ट्रेन

भारत में कई पहाड़ी रेलमार्ग जैसे कालका-शिमला रेलवे, दार्जलिंग हिमालयन रेलवे और नीलगिरी पर्वतीय रेलवे हैं जहां की ट्रेनों में डबल इंजन लगाए जाते हैं।

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