भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। ऐसे में आपने भी कभी ना कभी ट्रेन में सफर जरूर किया होगा।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ट्रेन में आगे और पीछे दोनों इंजन क्यों लगा होता है। अगर आप भी नहीं जानते हैं कि ट्रेन के दोनों तरफ इंजन क्यों लगा होता है तो यहां जान लीजिए।
बता दें जिन ट्रेनों में डबल इंजन लगाए जाते हैं उसे मल्टीपल यूनिट ऑपरेशन कहा जाता है। यह ट्रेनें ज्यादा वजन खींचने की क्षमता रखती हैं।
ट्रेन में डबल इंजन का इस्तेमाल हार्स पावर बढ़ाने के लिए किया जाता है। सामान्य तौर पर इंजन 4000 हार्स पावर से लेकर 8000 हार्स पावर का होता है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने 9000 हार्स पावर का इंजन तैयार किया है।
इसके अलावा मालगाड़ी में भी कई बार डबल इंजन होता है। हालांकि यह गुड्स पर निर्भर करता है। कहा जाता है कि इन इजनों की क्षमता 4000 से 4500 हॉर्सपावर होती है। ऐसे में डबल इंजन लगने के बाद इनकी पावर 8000 से 9000 हो जाती है।
दो इंजन का मतलब यह नहीं है कि दोनों इंजन में अलग अलग ड्राइवर होते हैं, यहां दोनों इंजन का कंट्रोल एक ही लोकोपायलट के पास होता है। यहां पहले को लीड इंजन और दूसरे को ट्रेल इंजन कहा जाता है।
आमतौर पर डबल इंजन का इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों या चढ़ाई वाले रेलवे ट्रैक पर किया जाता है।
भारत में कई पहाड़ी रेलमार्ग जैसे कालका-शिमला रेलवे, दार्जलिंग हिमालयन रेलवे और नीलगिरी पर्वतीय रेलवे हैं जहां की ट्रेनों में डबल इंजन लगाए जाते हैं।