उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ दो दिन के दौरे पर जापान की राजधानी 'टोक्यो' पहुंचे। उनका मकसद राज्य में इंडस्ट्रियल रिश्ते बढ़ाना और इन्वेस्टमेंट लाना है। पहुंचते ही उन्होंने कहा 'उगते सूरज की नवोन्मेषी भूमि को प्रभु श्री राम की पावन धरा के 'आदित्य' का नमस्कार...' जानें जापान को क्यों कहा जाता है 'उगते सूरज की भूमि'
दुनिया में पहले सूरज किस देश में निकलता है? इसका जवाब जापान है। इसे "उगते सूरज की धरती" या "लैंड ऑफ द राइजिंग सन" भी कहा जाता है। यह अनोखा नाम जापान की वजह से मिला है, जो एशियाई महाद्वीप के पूरब में है, जहां सूरज उगने के बाद सबसे पहले देखा जाता है।
जापानी में “जापान” का मतलब 'निहोन' या निप्पॉन है, जिसका मतलब है “सूरज की शुरुआत।” यही वजह है कि जापान के झंडे में सूरज की निशानी के तौर पर एक लाल गोला होता है।
दुनिया जापान को उसकी समृद्ध संस्कृति, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और सुंदर नजारों के लिए पसंद करती रही है। जापान को आमतौर पर उसकी भौगोलिक, ऐतिहासिक स्थिति और सांस्कृतिक महत्व के कारण “उगते सूरज की धरती” कहा जाता है।
जापान ईस्ट एशिया में है, इसकी भूगोलिक तौर पर ऐसी जगह है जहां से सूरज उगते हुए सबसे पहले देखा जा सकता है।
"लैंड ऑफ द राइजिंग सन" शब्द जापानी शब्द "निहोन" या "निप्पॉन" से बना है, जिसका सीधा मतलब है "सूरज की शुरुआत।" यह नाम हिस्टोरिकल तौर पर चीनी जानकारों ने जापान के लिए इस्तेमाल किया था, जिससे ये पता चलता है कि यह चीन के पूरब दिशा में है।
जापानी कल्चर और माइथोलॉजी में उगते सूरज का बहुत महत्व है। जापानी झंडे को 'निशोकी' या 'हिनोमारू' के नाम से जाना जाता है, इसमें सूरज को दिखाने वाला एक लाल गोला होता है, जो उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक है।