भारत में वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह वंदे मेट्रो भी वातानुकूलित रहेगी। कुल मिलाकर वंदे भारत एक्सप्रेस से प्रेरित है। हालांकि, यह सामान्य मेट्रो ट्रेनों से अलग है और इसका किराया और रफ्तार अलग है। वंदे भारत एक्सप्रेस में 16 कोच होते हैं, लेकिन वंदे मेट्रो में 8 कोच होंगे। इसमें रैपिड रेल (Namo Bharat Train) जैसी फीलिंग मिलेगी।
वंदे मेट्रो में प्रति किलोमीटर के हिसाब से 1 रुपये 20 पैसे बतौर किराया वसूल किया जाएगा। यदि आप 100 किमी. का सफर करते हैं तो आपको 120 रुपये टिकट के लिए खर्च करने होंगे। वंदे भारत एक्सप्रेस और सामान्य मेट्रो से वंदे मेट्रो के किराए में फर्क है।
वंदे भारत मेट्रो की बात करें तो यह स्पीड के मामले में वंदे भारत एक्सप्रेस से आगे है। क्योंकि यह 100 किमी. की रफ्तार मौजूदा वंदे भारत ट्रेन से भी कम समय में पकड़ लेगी। कुल मिलाकर इनका पिकअप का समय और घटा है।
वर्तमान में संचालित वंदे भारत एक्सप्रेस को जीरो से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में 52 सेकेंड का समय लगता है, लेकिन वंदे भारत मेट्रो की डिजाइन कुछ खास है, जो जीरो से 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में महज 45 से 47 सेकेंड का समय लेगी। हालांकि, इसकी स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से कम रखी गई है।
वंदे मेट्रो की वास्तविक अधिकतम स्पीड 180 किमी. प्रति घंटे है, लेकिन वंदे भारत मेट्रो की स्पीड 130 किमी. प्रति घंटे है। इसका कारण है नजदीक मेट्रो स्टेशनों का होना। लिहाजा, इसकी स्पीड तेज रखने से कोई फायदा नहीं है। हालांकि, सामान्य मेट्रो की अधिकतम स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटे है।
देश की पहली वंदे मेट्रो ट्रेन ट्रेन अहमदाबाद से भुज के बीच संचालित होगी। 16 सितंबर को पीएम मोदी हरी झंडी दिखाकर लोगों को तोहफा देंगे। देश की पहली वंदे मेट्रो ट्रेन सप्ताह में रविवार को छोड़कर 6 दिन चलेगी, जिससे बड़ी संख्या में रोजाना आवागमन करने वाले यात्री सफर कर सकेंगे।
वंदे मेट्रो ट्रेन भुज स्टेशन से सुबह 5 बजकर 5 मिनट में खुलेगी और अहमदाबाद 10 बजकर 50 मिनट पर पहुंचेगी। ये वंदे मेट्रो ट्रेन वापसी में अहमदाबाद से शाम 5 बजकर 30 मिनट में खुलेगी और रात में 11 बजकर 10 मिनट में भुज पहुंचेगी।
यह ट्रेन भुज से चलकर रास्ते में अंजार, गांधीधाम, भचाऊ, समाखियाली, हलवद , ध्रांगधरा, विरमगाम, चांदलोदिवा, साबरमती और अहमदाबाद रुकेगी। वंदे मेट्रो कोच में इमरजेंसी की स्थिति में ट्रेन ड्राइवर से बात करने के लिए टॉक बैक सिस्टम है। हर कोच में 14 सेंसर के साथ आग और धुएं का पता लगाने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। ट्रेन में किसी प्रकार के उठने वाले धुएं का तुरंत पता चल सकेगा।