जयगढ़ के किले को उसकी स्ट्रैटेजिक लोकेशन के लिए भी जाना जाता है। यह राजपूत राजाओं की मिलिट्री स्ट्रेंग्थ का शानदार नमूना है।
पहियों पर खड़ी दुनिया की सबसे बड़ी तोप इसी जयगढ़ में है। इस तोप का नाम जयवाण तोप है। इस तोप का कुल वजन करीब 50 टन है और यह 20 फीट लंबी है।
इस तोप को साल 1720 में किले के अंदर ही डिजाइन करने के बाद यहीं बनाया गया था। माना जाता है कि इस तोप से कई किलोमीटर दूर तक 50 किलो से ज्यादा भारी गोले दागे जा सकते हैं।
एक तरह से कहें तो यह तोप हाथी दांत है, क्योंकि इसका कभी भी युद्ध में इस्तेमाल ही नहीं हुआ। यह मिलिट्री इंजीनियरिंग का नमूना होने के साथ ही किले के मिलिट्री इम्पोर्टेंस को भी दर्शाती है।
इस किले को विजय का किला भी कहते हैं, जिसे महाराजा जय सिंह द्वितीय ने बनावाया था, जिन्होंने जयपुर को भी बसाया था। अरावली की पहाड़ियों में मौजूद जयगढ़ का किला, आमेर का किला और माओटा झील के सामने है। यह आमेर के किले को प्रोटेक्शन देता था और रॉयल परिवार की डिफेंस के लिए बनाया गया था।
जयगढ़ का किला राजपूत और मुगल स्टाइल का मिक्सचर है। गढ़ की बड़ी-बड़ी दीवारें, सुरक्षा उपाय और बड़े आंगन हैं। किले में एक के बाद एक कई वॉच टावर हैं। किले में बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लिए रेन वाटर स्टोरेज टैंक भी बनाया गया है।
कहा जाता है कि जयगढ़ के किले में एक अंडरग्राउंड टनल भी है, जो आमेर के किले तक जाती है। इस टनल के बारे में ज्यादा कुछ पड़ताल नहीं की गई है। कहा जाता है कि किसी हमले के समय रॉयल फैमिली के किले से बाहर निकलने के लिए या दोनों किलों के बीच सफर के लिए इस टनल का इस्तेमाल होता था।
इस किले में कई रॉयल पैलेस हैं, मंदिर और गार्डन हैं। यहां पर लाल महल भी है, जहां पर महाराजा रहा करते थे।