महाभारत के समय बल और बुद्धि के पर्याय भीष्म पितामह का यह मंदिर कुम्भ नगरी प्रयागराज में गंगा नदी के किनारे दारागंज में नाग वासूकी मंदिर के मुख्य द्वार पर है।
नाग वासूकी मंदिर के मुख्य द्वार के पास भीष्म पितामह की विशालकाय प्रतिमा बनी हुई है। माना जाता है कि यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। दीपावली और पितृ पक्ष में विशेष तौर पर श्रद्धालु दीप जलाने आते हैं।
मंदिर परिसर में भीष्म पितामह की प्रतिमा लेटे हुए है। कुरुक्षेत्र के मैदान में जब अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शय्या पर लिटा दिया था, वही प्रतिमा इस मंदिर में बनाई गई है।
कहा जाता है कि भीष्म पितामह की 12 फीट लंबी प्रतिमा में जो लोहे के तीर लगे हैं उनसे आज भी लगातार खून निकलता निकलता रहता था। प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने हजारों साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी।
यहां के पुरोहितों के अनुसार पहले प्रतिमा से खून रिसता रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
भीष्म अष्टमी के अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु यहां पर विशेष पूजा-अर्चना करने आते हैं।
यहां पर आधुनिक मंदिर का निर्माण हाई कोर्ट के वकील जेआर भट ने करवाया, जिसका काम 1961 में पूरा हुआ। एक महिला यहां रोज गंगा में डुबकी लगाने आती थी, उन्हीं की रिक्वेस्ट पर इस मंदिर का निर्माण हुआ।