यूपी में नोएडा, लखनऊ, कानपुर और आगरा में लोग मेट्रो सेवा का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में गोरखपुर, मेरठ, बरेली के साथ प्रयागराज में मेट्रो ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। आज हम संगमनगरी में चलने वाली लाइट मेट्रो के बारे में बात करेंगे। प्रयागराज में लाइट मेट्रो में सफर का सपना जल्द ही पूरा होने वाला है। अगले वित्तीय वर्षों में परियोजना के लिए ट्रैक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। फिलहाल, मेट्रो प्रोजेक्ट में 2 लाइनें शामिल हैं, जो 44 किलोमीटर के कॉरिडोर में बंटे हैं। परियोजना के विकास के लिए 8125 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। इसमें जमीन अधिग्रहण के साथ 30 वर्षों का आपरेशन और मेंटेनेंस भी किया जाएगा।
प्रयागराज मेट्रो को समाजवादी सरकार यानी तात्कालीन सीएम अखिलेश (Akhilesh Yadav) के कार्यकाल में 2016 में मंजूरी मिली थी। हालांकि, साल 2019 में योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के बजट में प्रारंभिक कार्य शुरू करने के लिए 175 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे। रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकनॉमिक सर्विस (RITES) ने अपनी रिपोर्ट के मुताबिक, कयास लगाए जा रहे हैं कि साल 2025 में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले (Mahakumbh 2025) से पहले संगमनगरी में मेट्रो संचालन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, यह कितना संभव अभी कहना मुश्किल होगा।
प्रयागराज लाइट मेट्रो एक लाइट रेल अर्बन ट्रांजिट सिस्टम (LRT) है, जिसे कम सवारियों की आवश्यकता वाले शहरों में चलाया जाता है। क्योंकि संगम नगरी की अन्य शहरों के साथ कनेक्टिविटी दूर है। ऐसे में यह सेवा काफी मानी जा रही है। यह मेट्रो सिस्टम मौजूदा मेट्रो के लिए फीडर सिस्टम के रूप में काम करती है। यह सामान्य मेट्रो की तुलना में कम लागत पर कम सवारियां की आवश्यकता का ख्याल रखती है। इसके लिए सड़क मार्गों से अलग डिडिकेटेट ट्रैक होंगे। लाइट मेट्रो ट्रेन में 70 से 80 लोगों की बैठने की क्षमता वाले 3 कोच लगाए जाएंगे। हालांकि, ट्रेन के अंदर लगभग 300 यात्री खड़े होकर सफर का लुत्फ उठा सकेंगे।
प्रयागराज मेट्रो शहर के 2 रूटों पर चलेगी। पहला बमरौली-सिटी लेक और दूसरा शांतिपुरम-छिवकी लाइन होंगी। ये दोनों 44 किलोमीटर के रूट लाइन होंगे, जिनमें बमरौली-सिटी झील 23 किमी. का सबसे लंबा रूट है, जबकि शांतिपुरम-छिवकी रूट 21 किमी. लंबा है। बमरौली-सिटी लेक रूट पर 20 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जबकि शांतिपुरम-छिवकी रूट पर स्टेशनों की संख्या 19 होगी।
प्रयागराज मेट्रो के लिए अभी टिकट का स्ट्रक्चर तैयार नहीं किया गया है। लेकिन, माना जा रहा है कि आगरा मेट्रो (Agra Metro) की भांति ही टिकट के दाम निर्धारित किए जाएंगे। यानी लोग कम समय में लोग शहर का चौतरफा घूमकर नजारा ले सकेंगे। खासकर, कामकाजी और छात्रों के लिए काफी सहूलियत होगी। मेट्रो प्रोजेक्ट के कंपलीट होने से शहर के अंदर ट्रैफिक जाम की स्थिति से छुटकारा मिलेगा।
प्रयागराज भारत के सबसे पुराने शहरों में शुमार है। यह शहर संस्कृति से परिपूर्ण धार्मिक नगरी है। यह त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) के करीब स्थित है, जो गंगा, यमुना और सरस्वती तीन नदियों का संगम है। यहां कुंभ और महाकुंभ का आयोजन होता है। यहां देश विदेश से पर्यटकों का आवागमन रहता है। यह शहर पर्यटन के लिहाज से काफी समृद्ध है।
प्रयागराज मेट्रो परियोजना के लॉन्च होने से संबंधित स्टेशनों के आसपास रियल स्टेट बिजनेस को बूस्ट मिला है। अब मेट्रो कॉरिडोर के आसपास जमीनों के दाम में काफी उछाल है। मेट्रो स्टेशनों के आसपास बाजारों में काफी संभावनाएं नजर आएंगी। स्टेशनों पर आउटलेट खुलेंगे, जिससे लोग स्टेशन के अंदर ही खाने-पीने की चीजें उपलब्ध होंगी। स्टेशनों के नीचे तमाम आउटलेट खुलने से यात्रियों को सहूलियत मिलेगी।