भारत के कई शहरों में मेट्रो ट्रेनें सफर आसान बना रही हैं। साल 2025 के अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, 23 शहरों में मेट्रो सेवाएं मिल रही हैं। अनुमान के मुताबिक, करीब 1000 किलोमीटर से अधिक के नेटवर्क के साथ भारत दुनिया का तीसरा मेट्रो नेटवर्क के रूप में अंकित है। आने वाले शहरों में जनसंख्या और जरूरत के मुताबिक, कई अन्य शहरों को मेट्रो से लैस किया जाएगा, ताकि शहरों के भीतर जाम से राहत और यात्रियों को आसान सफर की सहूलियत दी जा सके। तो आइये जानते हैं देश के किस शहर में सबसे अधिक मेट्रो ट्रेनें दौड़ रही हैं।
भारत में सबसे पहले कोलकाता में साल 1984 में मेट्रो ट्रेन का संचालन किया गया था। इसके बाद राजधानी दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क तैयार किया गया, जिससे यातायात के क्षेत्र में एक क्रांति आई। बड़ी जनसंख्या वाले दिल्ली के मौजूदा 13 जिलों के विभिन्न हिस्सों के बीच विभिन्न रूटों पर बड़ी संख्या में मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं।
मौजूदा समय में देश की राजधानी दिल्ली, और एनसीआर के नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, नागपुर, पुणे, जयपुर, भोपाल, इंदौर, अहमदाबाद, कानपुर, लखनऊ और आगरा जैसे शहरों में मेट्रो ट्रेनें लोगों का सफर आसान बना रही हैं।
वर्तमान में दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे लंबा, बड़ा और सबसे बिजी मेट्रो नेटवर्क है। जानकारी के मुताबिक, मौजूदा समय में करीब 400 किलोमीटर के ट्रैक बिछे हुए हैं और कई परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है व कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जो एनसीआर के कई शहरों तक डायरेक्ट कनेक्टिविटी दे रही हैं।
दिल्ली मेट्रो एनसीआर के कई शहरों को जोड़ता है, जिससे लगभग रोजाना अनुमानित 50 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। लिहाजा, इसे देश का सबसे व्यस्त मेट्रो नेटवर्क है। इस नेटवर्क में 285 से अधिक स्टेशन हैं, जहां से दिनभर 10-10 मिनट के अंतराल में मेट्रो ट्रेनें फेरे लगाती हैं। त्योहारों और विभिन्न विशेष समयों के दौरान फ्रीक्वेंसी में इजाफा किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो नेटवर्क 12 से अधिक कलर कोडेड लाइनें हैं, जहां से एयरपोर्ट, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद की लाइनों को कनेक्ट करता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि फेज-4 परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह नेटवर्क 500 किलोमीटर से अधिक का हो जाएगा। दिसंबर 2025 तक, दिल्ली मेट्रो का कुल ऑपरेशनल नेटवर्क लगभग 394 से 395 किलोमीटर लंबा हो गया है। यह नेटवर्क 12 से अधिक कलर-कोडेड लाइनों और 289 से अधिक स्टेशनों (एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन सहित) में फैला है, जो दिल्ली-NCR (गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद) को जोड़ता है। फेज-4 के पूरा होने पर यह नेटवर्क 500 किमी से अधिक हो जाएगा।
दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के तहत 6 कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें 44 से अधिक मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। इनमें हरियाणा में सोनीपत के नाथूपुर से दिल्ली में रिठाला (दिल्ली) मेट्रो को जोड़ेगा। उम्मीद है कि साल 2028 तक इन दोनों शहरों के बीच मेट्रो कॉरिडोर तैयार होने के बाद सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी, जिससे जाम से राहत के साथ लोगों आवाजाही में बड़ी सहूलियत होगी। फिलहाल, परियोजना का कार्य तेजी से पूरा करने की कवायद जारी है। चौथे चरण में गोल्डन लाइन (एयरोसिटी-तुगलकाबाद), मैजेंटा लाइन एक्सटेंशन (जनकपुरी-पश्चिम-आरके आश्रम), पिंक लाइन एक्सटेंशन (मजलिस पार्क-मौजपुर), रिठाला-नरेला-कुंडली कॉरिडोर और ग्रीनलाइन एक्सटेंशन (इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ) इत्यादि शामिल हैं।
दिल्ली का सबसे पहला मेट्रो कॉरिडोर साल 2002 दिसंबर में शाहदरा-तीस हजारी कोर्ट के बीच 8.2 किलोमीटर शुरू किया गया था। फिलहाल, दिल्ली में सुविधा और जगह के हिसाब से अंडरग्राउंड और एलिविटेड मेट्रो कॉरिडोर हैं। मौजूदा समय में पिंक लाइन दिल्ली मेट्रो की 59 किलोमीटर की सबसे लंबी लाइन है, जो विस्तार के बाद और लंबी हो जाएगी।