प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की नवंबर में हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि NCR के कुल 2.97 करोड़ वाहनों में से करीब 1.57 करोड़ वाहन सिर्फ दिल्ली में पंजीकृत हैं, जबकि दिल्ली NCR के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.7% हिस्सा है। बैठक में यह भी सामने आया कि सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बेहद कम है, जो प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण बन रही है।
रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने ट्रांसपोर्ट विभाग का बजट 2024-25 के 5,700 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2025-26 में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया है। इस बढ़े हुए बजट का बड़ा हिस्सा मेट्रो, क्षेत्रीय रेल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने पर खर्च किया जाएगा।
सरकार ने दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तीन नॉन-प्रायोरिटी कॉरिडोर-लाजपत नगर से साकेत, इंदरलोक से इंद्रप्रस्थ और रिठाला से कुंडली को मंजूरी दी है। साथ ही, फेज-4 के तीन प्रायोरिटी कॉरिडोरों (मजलिस पार्क-मौजपुर, जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम मार्ग और एयरोसिटी-तुगलकाबाद) का काम अगले साल पूरा होने का दावा किया गया है। इन 44 स्टेशनों से दिल्ली के ट्रैफिक दबाव में कमी आने की उम्मीद है।
दिल्ली–मेरठ नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के 2026 में पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। यह सिस्टम दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच तेज, स्वच्छ और भरोसेमंद यात्रा का विकल्प देगा।
दिल्ली सरकार राजधानी की बस सेवा को मजबूत करने के लिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) में क्लस्टर बस ऑपरेटर DIMTS के संचालन को शामिल करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और पब्लिक बस सिस्टम ज्यादा कुशल बनेगा। साथ ही, बस रूट्स के युक्तिकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि ओवरलैप कम हो और मेट्रो व RRTS से बेहतर कनेक्टिविटी मिले।
पुरानी लो-फ्लोर CNG बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर दिल्ली पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ रही है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह के अनुसार, 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 7,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें होंगी। हालांकि यह संख्या सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों से अब भी कम रहेगी।
अप्रैल 2026 में लागू होने वाली नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति पर काम चल रहा है। इसमें खरीद सब्सिडी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी रीसाइक्लिंग जैसे प्रावधान होंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संकेत दिए हैं कि पेट्रोल, डीजल और CNG वाहनों को खरीदना आगे चलकर और कठिन किया जा सकता है। साथ ही, ट्रैफिक जाम बढ़ाने वाले अनियंत्रित ई-रिक्शाओं के लिए भी नए नियम लाने की तैयारी है।