बिहार के मुजफ्फरपुर को भारत में लीची उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल गर्मियों के मौसम में यह इलाका लीची की भारी पैदावार के कारण चर्चा में आ जाता है। यहां के बागानों में लीची के पेड़ भरपूर फल देते हैं और बाजारों में ताजी लीची की बड़ी आपूर्ति होती है। इसी वजह से इसे “लीची कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” यानी दुनिया की लीची राजधानी भी कहा जाता है। उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु, लंबी खेती परंपरा और ‘शाही लीची’ जैसी खास किस्में मिलकर मुजफ्फरपुर को लीची उत्पादन में सबसे आगे रखती हैं। यही कारण है कि यह शहर आज भी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में “लीची कैपिटल” के नाम से पहचाना जाता है।
बिहार भारत में लीची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और मुजफ्फरपुर इसका मुख्य केंद्र है। इसके आसपास के जिले जैसे वैशाली और समस्तीपुर भी उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन इलाकों से देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी मात्रा में लीची भेजी जाती है, जिससे पूरे भारत की मांग पूरी होती है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने देश में 2024-25 के लिए लीची उत्पादन के ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं, जिनमें बिहार ने एक बार फिर टॉप स्थान हासिल किया है। देश के कुल लीची उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे अधिक दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, बिहार ने 136.32 हजार मीट्रिक टन लीची उत्पादन किया है, जो कुल उत्पादन का 23.18 प्रतिशत है। इसके बाद पंजाब दूसरे स्थान पर रहा, जहां 74.97 हजार मीट्रिक टन (12.75%) उत्पादन दर्ज किया गया। पश्चिम बंगाल ने 71.72 हजार मीट्रिक टन उत्पादन के साथ 12.19 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की, जबकि झारखंड 63.12 हजार मीट्रिक टन उत्पादन के साथ 10.73 प्रतिशत हिस्सेदारी पर रहा।
मुजफ्फरपुर की जमीन और मौसम लीची की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। यहां की मिट्टी गंगा के मैदानों की उपजाऊ मिट्टी है, जो फलों के विकास के लिए बेहतरीन मानी जाती है। गर्म और नम मौसम तथा पर्याप्त नमी लीची के पेड़ों को सही तरीके से बढ़ने में मदद करते हैं। यही प्राकृतिक परिस्थितियां इस क्षेत्र को लीची उत्पादन में आगे रखती हैं।
मुजफ्फरपुर में लीची की खेती कोई नई बात नहीं है। यह यहां की कृषि परंपरा का हिस्सा रही है, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है। किसान समय के साथ लीची की खेती के बेहतर तरीके सीखते और अपनाते आए हैं। इस लंबे अनुभव ने यहां की लीची को गुणवत्ता के मामले में और भी बेहतर बना दिया है।
लीची का मौसम आमतौर पर मई से जून के बीच होता है। इस समय मुजफ्फरपुर के बागानों में ताजे फल तैयार हो जाते हैं। ट्रकों और अन्य साधनों से लीची को बड़े शहरों में भेजा जाता है। गर्मियों में इसकी मांग बहुत बढ़ जाती है, जिससे किसानों और व्यापारियों को अच्छा बाजार मिलता है।
मुजफ्फरपुर की पहचान को और मजबूत बनाती है यहां की मशहूर ‘शाही लीची’। यह लीची अपनी मिठास, रसीले गूदे और खास सुगंध के लिए जानी जाती है। इसे भौगोलिक संकेत (GI टैग) भी मिला है, जो इसे आधिकारिक रूप से एक खास क्षेत्र की उत्पाद पहचान देता है। इस कारण इसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह अधिक रहती है।
लीची की खेती मुजफ्फरपुर की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती है। इससे हजारों किसानों और मजदूरों को रोजगार मिलता है। इसके अलावा, व्यापारियों और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों को भी इसका फायदा होता है। देशभर के बड़े शहरों में यहां की लीची एक प्रीमियम फल के रूप में जानी जाती है।