सैन्य खर्च के मामले में अमेरिका ने 2025 में भी अपनी बादशाहत कायम रखी है। अमेरिका ने दुनिया के कुल सैन्य खर्च का करीब एक-तिहाई हिस्सा अकेले खर्च किया, जिससे वह सबसे बड़ा रक्षा बजट रखने वाला देश बना रहा। रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी दूसरा देश वैश्विक सैन्य खर्च में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी तक नहीं पहुंच सका। इससे अमेरिका और अन्य देशों के बीच रक्षा बजट का बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका का विशाल रक्षा बजट उसकी दुनिया भर में फैली सैन्य मौजूदगी, अत्याधुनिक हथियार कार्यक्रमों और मजबूत अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों का परिणाम है। यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने और साझेदार देश हैं, जिनकी सुरक्षा और रक्षा रणनीतियों में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यही वजह है कि अमेरिका आज भी दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है।
साल 2025 में दुनिया के देशों ने अपनी सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भारी रकम खर्च की है। जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका सैन्य खर्च के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश बना हुआ है। अमेरिका ने इस साल रक्षा क्षेत्र पर करीब 954 अरब डॉलर खर्च किए हैं, जो दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 33.06 प्रतिशत है। यानी दुनिया में रक्षा पर खर्च होने वाले हर तीन डॉलर में से लगभग एक डॉलर अकेले अमेरिका खर्च कर रहा है।
सैन्य खर्च के मामले में चीन दूसरे स्थान पर है। चीन ने 2025 में अपनी सेना और रक्षा परियोजनाओं पर करीब 336 अरब डॉलर खर्च किए हैं। यह दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 11.62 प्रतिशत हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन लगातार अपने रक्षा बजट को बढ़ा रहा है।
रूस इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। रूस ने इस वर्ष करीब 190 अरब डॉलर का सैन्य बजट रखा है। दुनिया के कुल रक्षा खर्च में रूस की हिस्सेदारी 6.60 प्रतिशत है। रूस अपने रक्षा तंत्र को मजबूत बनाने और आधुनिक हथियारों के विकास पर लगातार निवेश कर रहा है।
यूरोप का प्रमुख देश जर्मनी इस लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। जर्मनी ने 2025 में करीब 114 अरब डॉलर सैन्य खर्च किया है। यह दुनिया के कुल रक्षा खर्च का 3.93 प्रतिशत है। यूरोप में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के कारण जर्मनी ने अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। भारत ने 2025 में करीब 92 अरब डॉलर रक्षा क्षेत्र पर खर्च किए हैं। वैश्विक सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी 3.19 प्रतिशत है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार निर्माण और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश बढ़ाया जा रहा है।
यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन इस लिस्ट में छठे स्थान पर है। ब्रिटेन ने इस साल करीब 89 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए हैं। यह दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 3.08 प्रतिशत है। ब्रिटेन अपनी नौसेना, वायुसेना और नई रक्षा तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच यूक्रेन ने भी अपने सैन्य खर्च में भारी बढ़ोतरी की है। 2025 में यूक्रेन ने करीब 84 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए हैं। यह दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 2.91 प्रतिशत हिस्सा है। लगातार जारी युद्ध के कारण यूक्रेन को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी पड़ रही है।
मध्य पूर्व का प्रमुख देश सऊदी अरब इस लिस्ट में आठवें स्थान पर है। उसने 2025 में करीब 83 अरब डॉलर रक्षा क्षेत्र में निवेश किया है। कुल वैश्विक सैन्य खर्च में उसकी हिस्सेदारी 2.88 प्रतिशत है। सऊदी अरब लंबे समय से अपने रक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।
2025 में फ्रांस ने 68 अरब डॉलर के साथ 9वें नंबर पर है। फ्रांस दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 2.36 प्रतिशत करता है।
2025 में जापान ने 62 अरब डॉलर का सैन्य खर्च किया है। जापान दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 2.15 प्रतिशत हिस्सा रखता है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और रक्षा अब देशों की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर शामिल हो चुकी है।
Jun 14, 2026