ये कहानी है सोहम पारेख की। एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार उन पर आरोप लगा है कि वे एक साथ 5 कंपनियों में जॉब कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वे 5 नौकरियों से हर साल 6.85 करोड़ रु कमाते हैं।
एक साथ एक से अधिक कंपनियों में काम करने को मूनलाइटिंग कहते हैं, जिसे अच्छा नहीं माना जाता और कंपनियां इसका विरोध करती हैं। मूनलाइटिंग को धोखा माना जाता है और सोहम पर यही आरोप है कि उन्होंने 5 स्टार्टअप्स को धोखा दिया।
सोहम एक टेकी हैं, जो मुंबई से हैं। जानकारों का मानना है कि मूनलाइटिंग करने वाले लोग माउस जगलर जैसे छोटे डिवाइस का यूज करते हैं, जो कर्सर को हिलाता रहता है। इससे लगता है कि व्यक्ति लगातार काम कर रहा है, जबकि उस समय वे किसी और कंपनी के लिए काम कर रहा होता है।
वहीं ऐसे लोग एआई का यूज करते हैं, लैपटॉप का कैमरा बंद रखते हैं, फालतू मीटिंग और कॉल से बचते हैं, जल्दी-जल्दी काम निपटाते हैं, मगर उसे डिलीवर धीरे-धीरे करते हैं।
इस पूरे प्रकरण में अब सोहम का भी जवाब आया है। YouTube पर TBPN के साथ एक इंटरव्यू में, सोहम ने झूठे बहाने से कई स्टार्टअप में काम करके एम्प्लॉयर्स को गुमराह करने की बात स्वीकार की।
हालाँकि उन्होंने कहा कि वे इस तरह के कामों का समर्थन नहीं करते, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला लालच से प्रेरित नहीं था, बल्कि उनकी फाइनेंशियल जरूरत इसका कारण थी।