तीन दशक से ज्यादा समय से बाजार में सक्रिय विजय केडिया उन निवेशकों में गिने जाते हैं जिन्होंने कई छोटे शेयरों को मल्टीबैगर बनते देखा और पकड़ा। उनकी खासियत छोटी कंपनियों में बड़े भविष्य को पहचानना है।
केडिया का निवेश मंत्र SMILE मॉडल है। इसमें S का मतलब है, स्मॉल साइज कंपनी। M यानी मीडियम एक्सपीरियंस वाला मैनेजमेंट। L का अर्थ है लार्ज एंबिशन यानी बड़ी महत्वाकांक्षा और E है एक्सट्रा लार्ज मार्केट अपॉर्च्युनिटी वाला कारोबार। इस तरह केडिया, छोटी कंपनी, मध्यम अनुभवी टीम, बड़े सपना और विशाल बाजार पर दांव लगाते हैं।
केडिया का कहना है कि वे उन कंपनियों को चुनते हैं, जो अपने सेक्टर में अभी छोटी हैं, लेकिन आगे चलकर बड़ी बनने की क्षमता रखती हैं। यही स्टॉक्स आगे चलकर सबसे ज्यादा रिटर्न देते हैं। केडिया का मानना है कि ग्रोथ की गुंजाइश छोटी कंपनियों के पास ज्यादा होती है।
केडिया कहते हैं कि उनके मुताबिक, कंपनी की मैनेजमेंट टीम के पास मीडियम अनुभव हों, यानी जिसने बाजार के उतार-चढ़ाव देखे हों और साथ ही आगे लंबे समय तक कंपनी को संभालने की संभावना हो, ताकि कंपनी स्थिरता के साथ बढ़ सके।
केडिया किसी कंपनी को कई साल ट्रैक करते हैं, तब निवेश करते हैं। इसके साथ ही कहते हैं कि एक बार जो पैसा वे निवेश कर देते हैं, उसे वह अपना नहीं मानते, बल्कि उस कंपनी का मानते हैं, जिसमें निवेश किया है। इसके साथ ही वे मैनेजमेंट पर भरोसा रखते हैं। छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से परेशान नहीं होते हैं।
केडिया कहते हैं कि फिल्म हिट होगी या नहीं, इसका ट्रेलर पहले दिखता है। इसके साथ ही कहते हैं वे हमेशा ऐसे खिलाड़ियों पर दांव लगाते हैं, जिनका प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन फिलहाल किसी चोट से उबरते हुए दिख रहे हैं।
केडिया कहते हैं कि PE या PB जैसे रेशियो से ज्यादा जरूरी है कंपनी का भविष्य। अगर बाजार बड़ा है और कंपनी बढ़ सकती है, तो वही मल्टीबैगर बनती है।