कोर्ट ने पाया कि जय अनमोल अंबानी को बैंक की ओर से कोई वैध कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था। बैंक ने नोटिस उस पते पर भेजा था, जिसे कंपनी साल 2020 में ही छोड़ चुकी थी। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि नोटिस सही तरीके से तामील हुआ था।
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अपने आदेश में साफ कहा कि किसी भी खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित करने से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना और उसका जवाब सुनना जरूरी है। चूंकि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, इसलिए बैंक का फैसला कानूनन गलत है।
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना नोटिस दिए खाते को धोखाधड़ी घोषित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आधार पर कोर्ट ने यूनियन बैंक द्वारा खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित करने के आदेश को रद्द कर दिया।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसका यह आदेश बैंक को भविष्य में कार्रवाई करने से नहीं रोकता। यूनियन बैंक चाहें तो जय अनमोल अंबानी को नया नोटिस जारी कर सकता है और नियमों के अनुसार दोबारा पूरी प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक नया नोटिस जारी करता है, तो उसे इस मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज जय अनमोल अंबानी को देने होंगे। इसके बाद उन्हें अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। जवाब मिलने के बाद ही बैंक कोई नया फैसला ले सकता है।
जय अनमोल अंबानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि यूनियन बैंक ने अक्टूबर में बिना किसी सूचना और सुनवाई के उनके खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया। उन्होंने इसे न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया और कोर्ट से इस फैसले को रद्द करने की मांग की थी।
इस पूरे मामले से जुड़ा एक और अहम पहलू यह है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जय अनमोल अंबानी और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इस कंपनी ने यूनियन बैंक (तत्कालीन आंध्रा बैंक) को लगभग 228 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। शिकायत के अनुसार, कंपनी ने मुंबई की एससीएफ शाखा से 450 करोड़ रुपये तक की कर्ज सीमा ली थी। कर्ज की किश्तें समय पर न चुकाने के कारण 30 सितंबर 2019 को इस खाते को एनपीए यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित कर दिया गया था।