विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमत में बढ़ोतरी का मुख्य कारण इसके औद्योगिक उपयोग में वृद्धि है। इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट, सेमीकंडक्टर और डेटा केंद्रों में चांदी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इससे बाजार में मांग और निवेश दोनों मजबूत हो रहे हैं।
कई वर्षों से चांदी की आपूर्ति में कमी रही है। यह कमी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि कम आपूर्ति और बढ़ती मांग कीमतों को ऊपर धकेलती है। इस वजह से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
ईटीएफ (Exchange Traded Fund) में भारी निवेश भी चांदी की कीमत बढ़ाने में मदद कर रहा है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों में कटौती की है और अगले साल और कटौती की उम्मीद है। ब्याज दर में कमी निवेशकों को धातुओं में निवेश के लिए उत्साहित करती है।
डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने घरेलू निवेशकों के लिए रिटर्न और बढ़ा दिया है। वहीं, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं ने भी चांदी की मांग बढ़ाई है। वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी नाकाबंदी, रूस-यूक्रेन युद्ध और नाइजीरिया में सैन्य हमले से निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं।
आईएएनएस के मुताबिक एमसीएक्स में मार्च कॉन्ट्रैक्ट की कीमत शुक्रवार को 2,32,741 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। कई विश्लेषक अब 2026 में चांदी का लक्ष्य 100 डॉलर प्रति औंस तक मान रहे हैं। अगले साल के लिए अधिकतर विशेषज्ञ 70-85 डॉलर प्रति औंस की सीमा की उम्मीद कर रहे हैं।
आईएएनएस के मुताबिक हालांकि, एक्सिस म्यूचुअल फंड ने चेतावनी दी है कि चांदी के अधिक मूल्यांकन से ईटीएफ से निकासी हो सकती है। इसके अलावा तांबे जैसी अन्य धातुओं में गिरावट भी चांदी की कीमत पर दबाव डाल सकती है। निवेशकों को यह ध्यान में रखना होगा।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी के लिए दृष्टिकोण सकारात्मक है। औद्योगिक मांग, कम आपूर्ति, ईटीएफ निवेश और ब्याज दरों में कटौती जैसे कई अनुकूल कारक इसके मूल्य को ऊपर बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए चांदी भविष्य में भी आकर्षक विकल्प बनी हुई है।