रेल मंत्री ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। अभी जहां इस सफर में कई घंटे लगते हैं, वहीं बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह दूरी सिर्फ 1 घंटा 57 मिनट में तय की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह परियोजना देश में आधुनिक रेल तकनीक का नया दौर शुरू करेगी।
नई हाई स्पीड रेल परियोजनाओं का फायदा दूसरे बड़े शहरों को भी मिलेगा। मंत्री ने बताया कि मुंबई से पुणे का सफर केवल 48 मिनट में पूरा हो सकेगा। वहीं पुणे से हैदराबाद पहुंचने में सिर्फ 1 घंटा 55 मिनट लगेंगे। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों, कारोबारियों और उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। कम समय में यात्रा पूरी होने से आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ेंगी।
रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं में होने वाला करीब पूरा निवेश भारतीय कंपनियों और निर्माण क्षेत्र को मिलेगा। सरकार ने डिजाइन और निर्माण की प्रक्रिया को मानकीकृत कर दिया है, जिससे देश की कंपनियां बड़ी भूमिका निभा सकेंगी। इससे रेलवे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की निर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। सरकार का उद्देश्य है कि भारत रेल तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने।
मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे में पिछले कुछ वर्षों में पूंजी निवेश में बड़ा इजाफा हुआ है। पहले रेलवे का वार्षिक पूंजी खर्च करीब 66 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 2.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार लगातार रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने, नई लाइनें बिछाने, स्टेशन सुधारने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दे रही है। इससे रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल रहा है।
रेल मंत्री के अनुसार अब तक करीब 49 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा चुका है। यह जर्मनी के पूरे रेलवे नेटवर्क के बराबर माना जा रहा है। रेलवे ट्रैकों के विद्युतीकरण से डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार ने वैगन और लोकोमोटिव उत्पादन में भी बढ़ोतरी की है।
रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे अब केवल देश की जरूरतें पूरी नहीं कर रही, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों को भी रेल उपकरण निर्यात कर रही है। भारत अब अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को ट्रेन संचालन में इस्तेमाल होने वाले प्रोपल्शन सिस्टम भेज रहा है। यह भारतीय रेलवे तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मंत्री ने उद्योग जगत से विदेशी मुद्रा बचाने और निर्यात बढ़ाने की अपील भी की, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सके।
रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना 5 अप्रैल को पूरी हो गई है। कई चुनौतियों के बावजूद इस बड़े प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अभी इस कॉरिडोर पर करीब 480 ट्रेनें रोजाना चल रही हैं। इससे बंदरगाहों और देश के अंदरूनी इलाकों के बीच माल पहुंचाने का समय पहले के 48 घंटे से घटकर करीब 12 से 16 घंटे रह गया है। इससे उद्योगों को तेज और सस्ती लॉजिस्टिक्स सुविधा मिल रही है।