<strong>UPI, FD, कैश और क्रेडिट कार्ड से की छोटी सी गलती तो पक्का आ जाएगा इनकम टैक्स का नोटिस!</strong>

आज के समय में हर लेन-देन डिजिटल हो गया है। UPI से लेकर क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट तक सब कुछ आपकी फाइनेंशियल रिपोर्ट में दर्ज होता है। इसी वजह से इनकम टैक्स विभाग अब लेन-देन पर पहले से ज्यादा नजर रख रहा है। कई बार लोग बिना किसी गलत इरादे के भी ऐसा ट्रांजैक्शन कर देते हैं, जिसे सिस्टम हाई-वैल्यू मान लेता है और बाद में नोटिस आ सकता है।

Authored by: रिचा त्रिपाठीUpdated Dec 6 2025, 12:28 IST
इनकम टैक्स नियम Image Credit : Canva01 / 09

इनकम टैक्स नियम

जरूरी है कि आप उन नियमों को अच्छी तरह समझें जो रोजमर्रा के बैंकिंग, निवेश और खर्च से जुड़े हुए हैं। अगर आपके लेन-देन साफ और नियमों के दायरे में हैं, तो किसी भी नोटिस से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन अनजान में गलती करने पर परेशानी बढ़ सकती है।

​सेविंग अकाउंट नियम ​Image Credit : Canva02 / 09

​सेविंग अकाउंट नियम ​

सबसे पहले बात करें सेविंग अकाउंट में कैश डिपॉजिट की। कई लोग बिजनेस या दूसरी जरूरतों से बैंक में बड़ी रकम जमा कर देते हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि बैंक एक साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा की नकद जमा राशि को खुद ही आयकर विभाग को रिपोर्ट कर देता है।

कब आता है नोटिस Image Credit : Canva03 / 09

कब आता है नोटिस

इसका मतलब यह नहीं कि हर बार नोटिस आएगा, बल्कि विभाग सिर्फ यह देखना चाहता है कि यह पैसा कहां से आया है। अगर आपकी इनकम, बिजनेस या नौकरी से मेल खाती है, तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन अगर असंगति मिली, तो जांच की संभावना बढ़ सकती है।

​फिक्स्ड डिपॉजिट नियम  Image Credit : Canva04 / 09

​फिक्स्ड डिपॉजिट नियम

इसी तरह फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी बड़ी नकद रकम जमा करना सीधे सिस्टम में हाई-वैल्यू अलर्ट ट्रिगर कर देता है। अगर कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश में FD करता है, तो बैंक तुरंत इसे रिपोर्ट करता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि नकद में किए गए निवेश पर नजर रखी जा सके और ब्लैक मनी का पता लगाया जा सके। यहां भी नियम साफ है अगर पैसा सफेद है, सोर्स क्लियर है, तो कोई डर की बात नहीं।

क्रेडिट कार्ड नियम Image Credit : Canva05 / 09

क्रेडिट कार्ड नियम

क्रेडिट कार्ड भुगतान भी इन दिनों इनकम टैक्स सिस्टम की निगरानी में आता है। अगर कोई शख्स साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा ऑनलाइन, बैंक ट्रांसफर या EMI के जरिए अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाता है, या कैश में 1 लाख रुपये से ज्यादा भरता है, तो यह डेटा भी रिपोर्ट हो जाता है। इसके बाद टैक्स विभाग आपकी आय और खर्च को मैच करता है। अगर आपकी कमाई 6 लाख सालाना है और कार्ड बिल 12 लाख भर रहे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

​ज्वेलरी की खरीदारी  Image Credit : Canva06 / 09

​ज्वेलरी की खरीदारी

ज्वेलरी की खरीदारी पर भी अब सख्त नियम लागू हैं। अगर आप 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा का सोना, चांदी या डायमंड खरीदते हैं, तो PAN कार्ड देना अनिवार्य है। यह जानकारी सीधे टैक्स सिस्टम में दर्ज होती है। इसका मकसद है सोने-चांदी में ब्लैक मनी के निवेश को रोकना। अगर खरीदारी बैंक ट्रांसफर या कार्ड से है और आय अनुरूप है, तो कोई दिक्कत नहीं होती।

​शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड ​Image Credit : Canva07 / 09

​शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड ​

शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड में निवेश करने वालों को भी यह जानना जरूरी है कि अगर साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का निवेश या सेल ट्रांजैक्शन होता है, तो यह भी इनकम टैक्स सिस्टम में खुद-ब-खुद रिपोर्ट हो जाता है। इससे विभाग को आपके कैपिटल गेन, लॉस और टैक्स की जानकारी आसानी से मिल जाती है। इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि निवेश का पूरा रिकॉर्ड हमेशा रखें।

​प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री​Image Credit : Canva08 / 09

​प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री​

प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री सबसे ज्यादा मॉनिटर किया जाने वाला ट्रांजैक्शन है। किसी भी तरह की 30 लाख रुपये से अधिक कीमत की प्रॉपर्टी का डेटा सीधे टैक्स विभाग पहुंच जाता है। इसके अलावा यदि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले ही कैश में बड़ी रकम दी जाती है, तो सिस्टम इस ट्रांजैक्शन को हाई-रिस्क मानता है और तुरंत अलर्ट भेज सकता है।

इंटरनेशनल ट्रेवल Image Credit : Canva09 / 09

इंटरनेशनल ट्रेवल

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय ट्रेवल, महंगी ज्वेलरी खरीद, बड़े UPI पेमेंट, बिजनेस अकाउंट में भारी लेन-देन इन सबकी रिपोर्टिंग भी अब सामान्य प्रक्रिया है। ट्रैवल एजेंसियां, बैंक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े खर्चों का डेटा फाइल कर देते हैं। अगर खर्च आपकी आय से मेल खाता है, तो कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन असमानता होने पर विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।

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