Premanand Maharaj Car: अगर आप सोचते हैं कि लग्जरी कारों का काफिला सिर्फ अरबपतियों या बड़े कारोबारियों का होता है, तो वृंदावन में आपको एक अलग ही नजारा देखने को मिलेगा। यहां रहते हैं प्रेमानंद महाराज, जो न तो किसी संपत्ति के मालिक हैं, न ही उनके नाम कोई बैंक अकाउंट है। वे दावा करते हैं कि वे कभी धन स्वीकार नहीं करते। फिर भी, हर सुबह जब वे अपने आश्रम से बाहर निकलते हैं, वृंदावन की गलियां एक लग्जरी कार शो जैसी दिखने लगती हैं।
लैंड रोवर डिफेंडर, पोर्श कायेन, ऑडी Q3, स्कोडा कोडिएक और टोयोटा फॉर्च्यूनर लेजेंडर जैसी महंगी कारें उनके साथ चलती दिखती हैं। यह दृश्य किसी को भी चकित कर देता है क्योंकि महाराज जी वैराग्य का उपदेश देते हैं और करोड़ों की कारों में यात्रा करते हैं, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है। आइए जानते हैं...
इन कारों की चाबी प्रेमानंद महाराज के पास नहीं, बल्कि उनके भक्तों के दिलों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराज जिन कारों में यात्रा करते हैं, वे उनके शिष्यों की होती हैं। कई भक्त तो स्वयं ड्राइविंग करते हुए उन्हें ले जाना अपना सौभाग्य मानते हैं। उनके लिए यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति का प्रतीक है। महाराज का हर सफर, उनके आश्रम श्री हित राधा केली कुंज तक, श्रद्धा का चलता-फिरता जुलूस बन जाता है जहां करोड़ों की गाड़ियां भी भक्ति में झुक जाती हैं।
चमक-दमक से परे, प्रेमानंद महाराज का निजी जीवन बेहद सादा है। उनका दिन राधा नाम के जाप से शुरू होता है और नाश्ते में वे केवल आधा रोटी और सब्जी लेते हैं। गुर्दों की बीमारी और कमजोर स्वास्थ्य के बावजूद वे हर रात पैदल परिक्रमा करते हैं। सुबह 2 बजे से ही भक्त उनके साथ चलने लगते हैं, और पूरा वृंदावन भक्ति के सुरों से गूंज उठता है।
महाराज जी की लोकप्रियता सिर्फ वृंदावन तक सीमित नहीं है। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसे सेलेब्रिटी भी अपने बच्चों वामिका और अकाय के साथ उनके प्रवचनों में शामिल हो चुके हैं। वहीं, RSS प्रमुख मोहन भागवत भी उनके आश्रम में आ चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि उनकी शिक्षाएं हर वर्ग और विचारधारा को छूती हैं।
प्रेमानंद महाराज की जीवनशैली हमें यह सिखाती है कि त्याग का अर्थ गरीबी नहीं होता, बल्कि आसक्ति से मुक्ति होता है। वे बिना किसी संपत्ति या बैंक अकाउंट के रहते हुए भी उन चीजों से घिरे हैं जो दूसरों के लिए विलासिता हैं।हर ऑडी, लैंड रोवर या पोर्शे उनके चारों ओर घूमती है, लेकिन उनके भीतर कोई अहंकार नहीं सिर्फ भक्ति और समर्पण का भाव।