​हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, अब बाइक पर बच्चों को भी लगाना होगा हेलमेट​

​कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दोपहिया वाहनों पर सफर करने वाले बच्चों के लिए विशेष रूप से बनाए गए हेलमेट और सेफ्टी हार्नेस आसानी से उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें कहा गया था कि हेलमेट कानून होने के बावजूद छोटे बच्चों के लिए उचित आकार के हेलमेट बाजार में मिलना मुश्किल है। ऐसे में कई परिवार बच्चों को बिना हेलमेट या ढीले-ढाले बड़े हेलमेट पहनाकर सफर करवाते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल गलत है।​

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Nov 22 2025, 09:02 IST
​कानून है, पर समर्थन नहीं​Image Credit : Canva01 / 07

​कानून है, पर समर्थन नहीं​

​कोर्ट ने बताया कि नियमों के अनुसार दोपहिया वाहन चलाने वाले और पीछे बैठने वाले सभी यात्रियों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है, लेकिन बच्चों के लिए आवश्यक आकार और फिटिंग वाले हेलमेट उपलब्ध कराने के संबंध में निर्माताओं और दुकानदारों पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। ज्यादातर हेलमेट कंपनियां केवल वयस्क आकार पर ही ध्यान देती हैं, जिससे सही हेलमेट उपलब्ध न होने पर माता-पिता नियमों का पालन भी नहीं कर पाते।​

​बच्चों की सुरक्षा हेतु हेलमेट और हार्नेस पर फोकस​Image Credit : Canva02 / 07

​बच्चों की सुरक्षा हेतु हेलमेट और हार्नेस पर फोकस​

​हाई कोर्ट ने रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि हेलमेट निर्माताओं, टू-व्हीलर डीलर्स और रिटेल स्टोर्स के साथ मिलकर काम किया जाए, ताकि पूरे कर्नाटक में बाल-हेलमेट आसानी से उपलब्ध हो सकें। ​

​घायल होने वाले बच्चों की संख्या लगभग 15 प्रतिशत​Image Credit : Canva03 / 07

​घायल होने वाले बच्चों की संख्या लगभग 15 प्रतिशत​

​कोर्ट के सामने प्रस्तुत डेटा के अनुसार, दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में घायल होने वाले बच्चों की संख्या लगभग 15 प्रतिशत है और कई मामलों में सिर की गंभीर चोटें होती हैं। बच्चों की गर्दन की मांसपेशियाँ और हड्डियाँ विकसित अवस्था में होने के कारण वे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसके साथ ही निर्णय में चाइल्ड सेफ्टी हार्नेस को भी शामिल किया गया है, ताकि दुर्घटना के दौरान शरीर पर पड़ने वाले झटके को कम किया जा सके और सिर व रीढ़ की हड्डी पर दबाव न पड़े।​

​कीमत, उपलब्धता और जागरूकता जरूरी​Image Credit : Canva04 / 07

​कीमत, उपलब्धता और जागरूकता जरूरी​

​कोर्ट ने यह भी माना कि बच्चों के लिए बनाए गए हेलमेट आमतौर पर महंगे होते हैं। कम उत्पादन और विशेष डिजाइन की वजह से ये वयस्क हेलमेट की तुलना में 30-50% तक अधिक कीमत में मिलते हैं। इसलिए सरकार को कीमतों को नियंत्रित करने की व्यवस्था करनी होगी, ताकि सभी परिवार सुरक्षा उपकरण खरीद सकें।​

​भ्रम करें दूर​Image Credit : Canva05 / 07

​भ्रम करें दूर​

सिर्फ उपलब्धता बढ़ाने से समस्या पूरी तरह दूर नहीं होगी। कई माता-पिता गलतफहमी में रहते हैं कि छोटे सफर में हेलमेट की जरूरत नहीं या गोद में बैठा बच्चा सुरक्षित रहता है। कोर्ट ने जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया, ताकि ऐसे मिथकों को खत्म किया जा सके।

​अमल सबसे बड़ी चुनौती​Image Credit : Canva06 / 07

​अमल सबसे बड़ी चुनौती​

​निर्देश को लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों, निर्माताओं और दुकानदारों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। दुकानों में बच्चों के हेलमेट की अनिवार्य स्टॉकिंग, ट्रैफिक पुलिस द्वारा सख्त निगरानी, स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना जैसे कदम उठाने होंगे। ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और यूरोपीय देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है, जहाँ बच्चों के लिए सही आकार के हेलमेट उपलब्ध कराना अनिवार्य है।​

कोई तय सीमा नहींImage Credit : Canva07 / 07

कोई तय सीमा नहीं

​हाई कोर्ट ने फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है, जिससे तेजी से अमल को लेकर संशय बना हुआ है। फिर भी, अगर सरकार स्टॉकिंग, प्राइस कंट्रोल, जागरूकता और नियमों के अनुपालन में गंभीरता दिखाए, तो यह फैसला दोपहिया पर सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा में एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।​

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