आपको हैरानी होगी कि एक समय उन्होंने अपनी पहली कार, एक Fiat, इसलिए खरीदी थी कि अगर उनका फिल्मी करियर नहीं चला तो वह उसे टैक्सी बनाकर रोजगार चला सकें। ये कार उन्होंने करीब 18,000 रुपये में खरीदी थी
हालांकि कुछ रिपोर्ट के मुताबिक बाद में उनके बेड़े में ऑडी A8 (Audi A8), पोर्शे केयन (Porsche Cayenne), मर्सिडीज-बेंज S-क्लास (Mercedes-Benz S-Class), लैंड रोवर रेंज रोवर (Land Rover Range Rover), मर्सिडीज SL500 (Mercedes SL500) जैसी लग्जरी गाड़ियां भी शामिल हुईं।
लुधियाना के नसराली गांव में जन्मे धर्मेंद्र बचपन से ही फिल्मों के दीवाने थे। सिर्फ 13 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘शहीद’ (1948) देखी और दिलीप कुमार से इतने प्रभावित हुए कि हर दिन आईने के सामने बोलते- "मैं दिलीप कुमार बनना चाहता हूं।" पढ़ाई में कमजोर लेकिन सपनों में मजबूत इस लड़के ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वही मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम चमकाएगा।
एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने कहा था कि जब उन्होंने कुछ पैसे कमाए तो अपनी पहली कार Fiat खरीदी। उनके भाई अजीत ने नाराज होकर कहा- "पाजी, आप हीरो हैं, ओपन रूफ वाली कार लेते!" इस पर धर्मेंद्र ने मुस्कुराकर जवाब दिया- "इस इंडस्ट्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अगर कभी हालात खराब हुए तो इस Fiat को टैक्सी बनाकर घर चला लूंगा।" लेकिन दर्शकों के प्यार ने उन्हें कभी उस स्थिति में पहुंचने नहीं दिया।
1960 और 70 का दशक धर्मेंद्र के नाम रहा। उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, जिनमें फूल और पत्थर (1966), ममता (1966), अनुपमा (1966), आए दिन बहार के (1966) जैसी फिल्में शामिल हैं।
1967 में कुछ फिल्में नहीं चलीं, लेकिन 1968 ने उनके करियर को नया मोड़ दिया। शिकार, आंखें, इज्जत और मेरे हमदम मेरे दोस्त हिट साबित हुईं और उन्होंने अपनी जगह पक्की कर ली। यहां तक कि जब 1969 में राजेश खन्ना की सुपरस्टार लहर चली, तब भी धर्मेंद्र और मनोज कुमार अपनी लोकप्रियता बनाए रखे।
धर्मेंद्र सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और विनम्रता की मिसाल थे। एक Fiat कार से शुरू हुआ वह सफर आज भारतीय सिनेमा की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में शामिल है। उनके नाम में सिर्फ स्टारडम नहीं, बल्कि इंसानी जज्बा भी शामिल है।