लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को लोकभवन (मुख्यमंत्री कार्यालय) के सामने एक महिला और उसकी बेटी ने आत्मदाह का प्रयास किया। ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) नवीन अरोड़ा ने कहा, 'एक महिला को पुलिस ने बचा लिया, दूसरी महिला गंभीर हालत में है। उनका कोविड-19 परीक्षण किया जाएगा।' बताया जाता है कि भूमि विवाद के कारण परेशान होकर मां और बेटी ने ये कदम उठाया। 4 पुलिसकर्मियों को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया गया है।
घटना पर लखनऊ के पुलिस कमीश्नर सुजीत पांडे ने कहा, 'ये घटना आपराधिक षड्यंत्र के तहत की गई जिसमें कुछ लोगों ने भूमिका निभाई है। इसमें कांग्रेस नेता अनुप पटेल समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, MIM नेता कदीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है।'
जिलाधिकारी अरूण कुमार एवं पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग ने बताया कि कि साफिया का उसके पड़ोसी से नाली को लेकर कोई विवाद था। इस मामले में 9 जुलाई को मारपीट भी हुई थी। गर्ग ने बताया कि गुड़िया एवं उसकी मां ने आत्मदाह के प्रयास से संबंधित कोई पत्र नहीं दिया था और न ही खुफिया विभाग के पास इसकी कोई जानकारी थी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
घटना शुक्रवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे की है, जब अमेठी की दो महिलाओं ने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़का और खुद को आग लगा ली। इनमें से एक महिला का वीडयो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह आग की लपटों में भागती हुई नजर आ रही है। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट किया, 'जमीन विवाद मामले में अमेठी जिला प्रशासन से न्याय न मिलने पर मां-बेटी को लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह (का प्रयास) करने को मजबूर होना पड़ा। उत्तर प्रदेश सरकार इस घटना को गम्भीरता से ले, पीड़ितों को न्याय दे और लापरवाह अफसरों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करे ताकि ऐसी घटना पुनः न हों।'
वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, 'लोकभवन के सामने दो महिलाओं द्वारा आत्मदाह (के प्रयास) की घटना सोती हुई सरकार को जगाने के लिए क्या काफी नहीं है या फिर असंवेदनशील सरकार एवं मुख्यमंत्री जी किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। क्या उत्तर प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज़ है !'

