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इस मिठाई को कभी ना नहीं कहते यो यो हनी सिंह, जितना शानदार स्वाद उतना खास है इतिहास

Yo Yo Honey Singh की इस पसंदीदा मिठाई में विटामिन और फाइबर भरपूर होते हैं। हालांकि, इसमें चीनी, घी और मावा काफी मात्रा में इस्तेमाल होता है। इसलिए इसे स्वाद के लिए खाना चाहिए, पेट भरने के लिए नहीं।

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यो यो हनी सिंह को हद से ज्यादा पसंद है गाजर का हलवा।

Honey SIngh Favourite Sweet: फेमस रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बताया कि उनकी पसंदीदा मिछाई कौन सी है। यह स्वीट डिश उन्हें इतनी ज्यादा पसंद है कि वह उसे खाने से कभी मना नहीं करते। यूं तो इस मिठाई को ज्यादातर लोग भारत की समझते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं। हम जिस मीठे की बात कर रहे हैं वो है- गाजर का हलवा

गाजर का हलवा भारत की सबसे लोकप्रिय मिठाइयों में शुमार है। गर्मागर्म हलवा, ऊपर से मेवे की परत और घी की खुशबू..स्वाद ऐसा कि नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। सर्दियों में तो ये लगभग हर घर में एक ना एक बार जरूर बनती है। शादी ब्याह जैसे अवसरों पर तो मुमिकन है ये बारहों महीने मिल जाए।

कहां से आया गाजर का हलवा

इतिहासकारों की मानें तो भारत में गाजर का हलवा मुगल अपने साथ लाए थे। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी के दौरान नारंगी रंग की गाजरें अफगानिस्तान के रास्ते पंजाब पहुंचीं। इसके बाद धीरे-धीरे गाजर का हलवा उत्तर भारत की रसोई का अहम हिस्सा बन गया। पहले ये मुगल बादशाहों के शाही रसोई का हिस्सा हुआ करती थी।

कुछ दूसरे फूड हिस्टोरियन्स मानते हैं कि सत्रहवीं शताब्दी में डच किसानों ने नारंगी गाजर उगाया था। माना जाता है कि यह विलियम ऑफ ऑरेंज को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। बाद में ये गाजरें अफगानिस्तान के रास्ते पंजाब पहुंचीं और फिर, जैसा कि कहा जाता है, इतिहास बन गया।

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कैसे बनता था गाजर का हलवा

उस दौर में महिलाएं कोयले के चूल्हों पर घंटों तक गाजर का हलवा पकाया करती थीं। वे धैर्य के साथ कद्दूकस की हुई गाजरों के नरम होने और दूध के धीरे-धीरे आधा रह जाने का इंतजार करती थीं। तभी हलवे में वह गाढ़ापन, मिठास और खास स्वाद आता था।

समय के साथ गाजर का हलवा बनाने का तरीका बदलता गया। पहले जहां इसे केवल दूध और गाजर के साथ धीरे-धीरे पकाया जाता था, वहीं आज कई लोग इसे जल्दी तैयार करने के लिए खोया या मावा भी मिलाते हैं। कहीं इसमें काजू और बादाम डाले जाते हैं, तो कहीं इलायची और किशमिश इसका स्वाद बढ़ाते हैं। भारत में तो अब गाजर का हलवा पारिवारिक मेल-मिलाप का भी हिस्सा बन चुका है।

गाजर का हलवा गाजर की वजह से कुछ पोषक तत्व, विटामिन और फाइबर भी देता है। हालांकि, इसमें चीनी, घी और मावा काफी मात्रा में इस्तेमाल होता है। इसलिए इसे स्वाद के लिए खाना चाहिए, पेट भरने के लिए नहीं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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