World's Shortest Ghazal: गज़ल पढ़ना, लिखना और सुनना..सालों से ये सिलसिला यूं ही चला आ रहा है। गज़लों की दुनिया में एक से बढ़कर एक फनकार हुए। गजल का अर्थ होता है कविता की वह विधा जिसमें आमतौर पर हुस्न और इश्क़, मिलन और विरह, शराब और शबाब, निराशा और हताशा और सूफ़ीवाद और अध्यात्म आदि की बातें कही जाएं। लेकिन ग़ज़ल किसी दायरे में बंधी नहीं रही। अब उसमें हर प्रकार के विषय और समस्याएं रची जाती हैं। ग़ज़ल हर बहर में कही जाती है। मोहब्बत के एहसास से जिंदगी के सबक तक, इश्क में जुदाई से दिल के दर्द तक हर तरह के जज्बात को गज़लों की शक्ल मिल चुकी है। चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है और होश वालों को खबर क्या जैसे कुछ गज़ल तो मोहब्बत का तराना बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे छोटी गजल कौन सी है औऱ किसने लिखी है।
गजल का हर शेर सामान्यतः अलग प्रकार के विषय का रखने वाला होता है। उसका पहला शेर मतला कहलाता है जिसके दोनों मिसरे हम-रदीफ़ और हम-क़ाफ़िया होते हैं। बाक़ी शेरों के मिसरा-ए-सानी अर्थात दूसरे मिसरे में क़ाफ़िया होता है। अंतिम शेर में जिसमें शायर का तख़ल्लुस अर्थात उपनाम हो मक़ता कहलाता है। गजल के सबसे बढ़िया शेर को शाह बैत कहते हैं।
गज़ल के लिए कहा जाता है कि उसे लिखने का एक तरीका होता है, उसके कुछ पैमाने होते हैं। गज़ल को एक तय मीटर में फिट किया जाता है। उसके कहने का तरीका भी ज़ुदा होता है। इसलिए गज़ल के मैदान में उतरने से पहले उसकी बाकायदा तालीम लेना बहुत जरूरी है। इसी तालीम के उत्तर प्रदेश के एक शख्स ने दुनिया की सबसे छोटी गजल लिख डाली थी।
सबसे छोटी गजल लिखना का कीर्तिमान दर्ज है यूपी के अशोक पांडे गुलशन को। उन्होंने सबसे छोटी गजल लिखकर एशिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज करा लिया। अशोक पांडे यूपी में बहराइच जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2021 में सबसे छोटी गजल लिखी थी।
सबसे छोटी गजल :
जिस सबसे छोटी गजल के लिए अशोक पांडे ने कीर्तिमान कायम किया है उसके बोल हैं-
जरें, तरें।
दर्द, हरें।
हृदय, भरें।
प्रेम, करें।
सभी, डरें।
मूंग, दरें।
घास, चरें।
फूल, झरें।
ध्यान, धरें।
जी हां, ये गजल बस इतनी ही है। इस पूरी गजल को आप चंद सेकेंड में पढ़ और सुन सकते हैं। बता दें कि अशोक पांडे ने हिंदी साहित्य में बड़ा योगदान दिया है। उनके अब तक 22 कविता एवं दो कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
