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World Environment Day 2023: क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस? जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम

  • Authored by: दीपक पोखरिया
  • Updated Jun 2, 2023, 02:18 PM IST

World Environment Day 2023: विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति और हरियाली के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा आयोजित सबसे बड़े वार्षिक आयोजनों में से एक है।

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World Environment Day 2023: हर साल 5 जून को मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस।

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World Environment Day 2023: लोगों को प्रकृति के महत्व के बारे में याद दिलाने के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2023) मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस 2023 (World Environment Day) हर साल की तरह इस साल भी 5 जून को मनाया जाएगा। ये पर्यावरण (Environment) के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय दिवस है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। इसे पहली बार 1974 में 'ऑनली वन अर्थ' विषय के साथ शुरू किया गया था। विश्व पर्यावरण दिवस हर साल एक नई थीम के साथ आता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2023 का इतिहास (World Environment Day 2023 History)

विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति और हरियाली के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा आयोजित सबसे बड़े वार्षिक आयोजनों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र सभा ने 1972 में विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना की, जो मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन का पहला दिन था। साल 1974 में इसे 'ऑनली वन अर्थ' थीम के साथ मनाया गया। तब से विभिन्न मेजबान देश इसे मनाते आ रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार 1974 में अमेरिका में मनाया गया था

विश्व पर्यावरण दिवस 2023 का महत्व (World Environment Day 2023 Significance)

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल दुनिया भर के लोगों को यह याद दिलाने के लिए मनाया जाता है कि हम अपने पर्यावरण को किस तरह से नुकसान पहुंचा रहे हैं, कैसे हमने अपने पर्यावरण के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है और इस नुकसान को दूर करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस 2023 की थीम (World Environment Day 2023 Theme)

विश्व पर्यावरण दिवस 2023 की थीम #BeatPlasticPollution है। ये याद दिलाता है कि प्लास्टिक प्रदूषण पर लोगों की कार्रवाई मायने रखती है। अब समय आ गया है कि इस कार्रवाई में तेजी लाई जाए और सर्कुलर इकॉनमी में परिवर्तन किया जाए।
दीपक पोखरिया
दीपक पोखरियाauthor

पहाड़ से हूं, इसलिए घूमने फिरने का शौक है। दिल्ली-नोएडा से ज्यादा उत्तराखंड में ही मन लगता है। कई मीडिया संस्थानों से मेरी करियर यात्रा गुजरी है और मई 2022 से Times Network में timesnowhindi.com के साथ जुड़ा हूं। यहां शुरूआत खबरों से हुई और अब नजरें फीचर टीम के जरिए पाठकों की पसंद के लेख लिखने पर रहती है। घुमक्कड़ी पसंद होने की वजह से मुख्य जिम्मेदारी timesnowhindi.com/travel की है। वैसे मैं देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल से हूं और यहीं पर जन्म हुआ। पढ़ाई की शुरुआत फिरोजपुर (पंजाब) से हुई। इसके बाद लखनऊ (उत्तर प्रदेश), रामपुर (उत्तकर प्रदेश), हल्द्वानी (उत्तराखंड) होते हुए देश की राजधानी दिल्ली से पढ़ाई की। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। साथ ही NIIT से GNIIT किया। इसके बाद दिल्ली से भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव। टीवी, वेबसाइट और मोबाइल ऐप में अब तक काम किया। नौकरी की शुरुआत 2011 से की। अभी टाइम्स नाऊ नवभारत में 2 से अधिक सीनियर करोस्पेंडट के पद पर हूं। यात्रा सेक्शन से जुड़ने से पहले करीब डेढ़ साल पहले तक न्यूज में ही काम किया।

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