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जीतना ही नहीं टिकना भी जरूरी, जानें क्यों शेर बनने से बेहतर है कॉकरोच बनना

Cockroach vs Lion Life Lessons: इतिहास गवाह है कि हर लड़ाई ताकत से नहीं जीती जाती। हम मैदान में टिके रहकर भी सामने वाले को पस्त कर सकते हैं।

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जानिए क्यों इंसान के लिए शेर से ज्यादा जरूरी है कॉकरोच बनना

Cockroach vs Lion Life Lessons: हम सबको बचपन से एक ही बात सिखाई जाती है- शेर बनो। शेर यानी ताकत, साहस, नेतृत्व और जीत का प्रतीक। अब सोचिए कि अगर कोई कहे कि शेर नहीं कॉकरोच बनो तो क्या होगा। शायद आपको ये बात अजीब लगे, लेकिन जिंदगी में कई बार शेर बनने से ज्यादा फायदेमंद कॉकरोच बनना होता है।

दरअसल, यह तुलना ताकत की नहीं, जीवन जीने की कला की है। शेर हमें जीतना सिखाता है, लेकिन कॉकरोच हमें बचे रहना सिखाता है। इतिहास गवाह है कि कई बार जीतने से ज्यादा टिके रहना जरूरी है। टिकता वही है जो खुद को किसी भी परिस्थिति में ढाल ले। कॉकरोचों को इसमें महारथ हासिल है।

सीमित है शेर का संसार

शेर निडर होता है। वह अपने इलाके का राजा है। नेतृत्व करता है और चुनौती से पीछे नहीं हटता। इंसान को भी शेर से यही सीख मिलती है कि जीवन में आत्मविश्वास जरूरी है। अपने फैसलों पर भरोसा रखें और मुश्किलों का सामना करें।

लेकिन शेर की एक कमजोरी भी है। वह केवल खास परिस्थितियों में ही फलता-फूलता है। उसका भोजन सीमित है, उसका इलाका सीमित है और बदलती परिस्थितियों में उसके लिए खुद को ढालना आसान नहीं होता। यही वजह है कि आज दुनिया में शेरों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

बहुत बड़ा सर्वाइवर है कॉकरोच

अब बात कॉकरोच की। शायद धरती पर सबसे कम पसंद किया जाने वाला जीव, लेकिन विज्ञान की नजर से देखें तो यह प्रकृति का सबसे सफल सर्वाइवर है। कॉकरोच हजारों साल से पृथ्वी पर मौजूद है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी एडाप्टिबिलिटी यानी कि परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढाल लेने की कला। जहां माहौल बदला, उसने खुद को बदल लिया। जहां खतरा आया, उसने छिपना सीखा। जहां संसाधन कम हुए, उसने कम में जीना सीख लिया।

जिंदगी में हमेशा जीतना जरूरी नहीं

हमारी समाज में ज्यादातर उन्हीं लोगों की तारीफ होती है जो सबसे आगे दिखाई देते हैं। जबकि हकीकत ये है कि हर सफलता मंच पर खड़े होकर नहीं मिलती। कई बार चुपचाप सीखने वाले, धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाले और परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने वाले लोग ज्यादा लंबी दौड़ जीतते हैं।

कॉकरोच हमें यही सिखाता है कि हर लड़ाई को लड़कर जीतना जरूरी नहीं होता। कुछ लड़ाइयों में बच जाना ही सबसे बड़ी जीत होती है।

बार-बार उठ खड़ा होता है कॉकरोच

कॉकरोच को भगाइए, वह फिर लौट आता है। रास्ता बंद कर दीजिए, वह दूसरा रास्ता खोज लेता है। इंसान भी अगर हर असफलता के बाद नया रास्ता तलाशना सीख जाए, तो शायद जिंदगी आसान हो जाए। असली सफलता वही है, जो गिरने के बाद फिर खड़े होने की हिम्मत दे।

शेर की हिम्मत, कॉकरोच की जिद

असल जिंदगी में सिर्फ शेर बनने की कोशिश अधूरी है। हमें दोनों से सीखने की जरूरत है। जब अन्याय दिखे, तब शेर की तरह निर्भीक बनिए। वहीं जब परिस्थितियां बदलें, तब कॉकरोच की तरह खुद को बदलने में भी संकोच ना करें।

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सबसे बड़ा सबक

प्रकृति हमें सिखाती है कि ज्यादातर वही जीव लंबे समय तक जिंदा रहते हैं, जो बदलाव को स्वीकार कर लेते हैं। यही हम इंसानों के साथ भी है। हम इतने लचीले बनें कि समय जैसा भी हो, हम टूटें ना।

इतिहास गवाह है कि हर लड़ाई ताकत से नहीं जीती जाती। हम मैदान में टिके रहकर भी सामने वाले को पस्त कर सकते हैं। और इस टिके रहने की कला में ये तो मानना ही पड़ेगा कि कॉकरोच कई बार जंगल के राजा शेर से भी आगे निकल जाता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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