Republic Day 2026: बदलूराम का बदन जमीन के नीचे, क्या है इस गाने की कहानी, जानिए कौन सी रेजिमेंट का है मार्चिंग सॉन्ग
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 22, 2026, 01:34 PM IST
Badluram ka badan song (Who is Badluram): गणतंत्र दिवस परेड की इन दिनों रिहर्सल चल रही है। ऐसे में एक वीडियो ने लोगों का खूब ध्यान खींचा है जिसमें एक रेजिमेंट के जवान एक खास गाना गाते सुनाई दे रहे हैं। ये गाना है बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है... । जानें कौन हैं बदलूराम, क्या है बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है की पूरी कहानी, बदलूराम का बदन गाने के लिरिक्स और बदलूराम का बदन कौन सी रेजिमेंट का थीम गीत है।
बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है... की पूरी कहानी
Badluram ka badan song (Who is Badluram): बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है… सोशल मीडिया पर इस गाने को गाते हुए देश की सेना के वीर जवानों की एक टुकड़ी का वीडियो खूब देखा जा रहा है। दरअसल, ये उनका थीम सॉन्ग है जिस पर वे गणतंत्र दिवस पर परेड की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद से लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर बदलूराम कौन हैं, क्या है बदलूराम की असल कहानी और कौन सी रेजिमेंट बदलूराम के गाने को गा रही है। देखें बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है गाने के बोल भी।
कौन थे शहीद बदलूराम?
राइफलमैन बदलूराम भारतीय सेना की असम रेजिमेंट के एक बहादुर जवान थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कोहिमा की ऐतिहासिक लड़ाई में जापानी सेना से लोहा लेते हुए वीरगति पाई। देश के लिए दिए गए उनके बलिदान की कहानी साधारण नहीं, बल्कि अद्भुत है। बदलूराम की शहादत के बाद एक अनोखी घटना घटी। रेजिमेंट के क्वार्टरमास्टर (रसद अधिकारी) उनका नाम राशन लिस्ट से हटा भूल गए। पर यही भूल आगे चलकर रेजिमेंट के लिए वरदान साबित हुई।
काम आया बदलूराम का ‘राशन’
कोहिमा की लड़ाई के दौरान जब जापानी सेना ने असम रेजिमेंट को चारों ओर से घेर लिया और सप्लाई लाइन पूरी तरह कट गई, तब सैनिकों के पास खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया। ऐसे समय में बदलूराम के नाम पर आने वाला अतिरिक्त राशन ही सैनिकों के लिए सहारा बना और कई जवानों की जान बची।
बदलूराम का बदन गाने के बोल
इस सच्ची और प्रेरक घटना को अमर बनाने के लिए मेजर एम.टी. प्रॉक्टर ने साल 1946 में यह गीत लिखा। गीत की मशहूर पंक्ति है -
बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है, हमें उसका राशन मिलता है। इस लिए हम जीते हैंं, और मरते भी हैं।
दरअसल यह गाना बताता है कि कैसे एक शहीद, शारीरिक रूप से मौजूद न होते हुए भी, अपने साथियों की रक्षा करता रहा। उनके लिए जीवन रक्षक बना।
बदलूराम का बदन गाना कब और किसने लिखा था
बदलूराम की शहादत पर उनके लिए यह गाना मेजर एम.एफ. प्रॉक्टर (Major M.F. Proctor) ने 1946 में लिखा था। इसकी धुन अमेरिकी मार्चिंग गीतों से ले गई। अगर आप ध्यान से सुनेंगे तो आपको इसमें 'जॉन ब्राउनस बॉडी' और 'द बैटल हाइम ऑफ़ द रिपब्लिक' जैसी गीतों की धुन महसूस होगी।
बदलूराम का बदन कौन सी रेजिमेंट का थीम सॉन्ग है
बदलूराम का बदन असम रेजिमेंट की शान और पहचान बन चुका है। और उनका थीम सॉन्ग है। गणतंत्र दिवस परेड, सैन्य समारोहों और ट्रेनिंग के दौरान इसे गर्व से गाया जाता है। यह गीत न सिर्फ अनुशासन और साहस दिखाता है, बल्कि भारतीय सेना के उस जज्बे को भी दर्शाता है, जहां एक शहीद कभी मरता नहीं।
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