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बच्चों से पैसों की चर्चा कब करनी चाहिए और कब बिल्कुल नहीं? एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

Parenting Advice: विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों से घर की माली हालत छिपाना हमेशा सही नहीं, लेकिन उन पर वयस्कों जैसी जिम्मेदारियां डालना भी उचित नहीं है।

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बच्चों से माली हालत की चर्चा करें या ना करें (AI Image)

Parenting Advice: महंगाई, ईएमआई, नौकरी का दबाव और बढ़ते खर्चों के बीच कई माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि क्या बच्चों को घर की आर्थिक स्थिति के बारे में बताना चाहिए? कुछ लोग मानते हैं कि बच्चों को सच्चाई पता होनी चाहिए, जबकि कुछ का मानना है कि इससे उनके मन पर अनावश्यक बोझ पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका जवाब ‘हां’ या ‘न’ में नहीं, कैसे और कितनी जानकारी दी जाए, इसमें छिपा है।

उम्र के हिसाब से करें बात

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे बच्चों को पैसों की जटिल समस्याओं में उलझाना ठीक नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उन्हें परिवार के बजट, बचत और खर्चों की बुनियादी समझ देना फायदेमंद हो सकता है। इससे वे पैसों की कीमत समझते हैं और जिम्मेदार बनते हैं।

पैसों की परेशानी संभल कर बताएं

अगर माता-पिता बार-बार कहते रहें कि घर में पैसे नहीं हैं, हम बर्बाद हो जाएंगे या अब कुछ नहीं बचा, तो बच्चे असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। कई बार वे खुद को परिवार की परेशानी का कारण मानने लगते हैं या अपनी छोटी-छोटी जरूरतें बताने से भी डरने लगते हैं।

अगर घर में आर्थिक चुनौतियां चल रही हैं तो बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सरल भाषा में बताया जा सकता है कि फिलहाल कुछ खर्चों में कटौती करनी होगी। साथ ही यह भरोसा भी देना जरूरी है कि परिवार मिलकर इस स्थिति से बाहर निकल आएगा। इससे बच्चे घबराने के बजाय सहयोग करना सीखते हैं।

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आर्थिक शिक्षा का अच्छा मौका

घर की सीमित आय और बजट के बारे में सही तरीके से बात करने से बच्चे बचत, योजना बनाना और जरूरत व इच्छा के बीच का फर्क समझते हैं। यही आदत आगे चलकर उन्हें आर्थिक रूप से जिम्मेदार इंसान बना सकती है।

किन बातों से बचें?

बच्चों के सामने पति-पत्नी पैसों को लेकर झगड़ा न करें। कर्ज, बैंक नोटिस या गंभीर आर्थिक संकट की पूरी जानकारी छोटे बच्चों पर न डालें। बच्चों को यह महसूस न होने दें कि उनकी पढ़ाई या जरूरतें परिवार पर बोझ हैं। बार-बार पैसों की कमी का डर दिखाकर उन्हें अपराधबोध में न डालें।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों से घर की माली हालत छिपाना हमेशा सही नहीं, लेकिन उन पर वयस्कों जैसी जिम्मेदारियां डालना भी उचित नहीं है। एक्सपर्ट्स की राय है कि उम्र के अनुसार बच्चों को आर्थिक हालात से रूबरू करवाएं। उसे भी पता हो कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते। लेकिन उसे ये भी बताएं कि कुछ तरीके अपनाकर हमारी माली हालत ठीक भी हो जाएगी। इसलिए पैसों की बात करें, लेकिन इस तरह कि बच्चे सीखें, घबराएं नहीं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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